भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के नतीजे सामने आ गए हैं। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जानकारी दी कि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। फिलहाल रेपो रेट 5.50% पर स्थिर बनी हुई है। इससे साफ है कि लोन लेने वालों की EMI पर कोई असर नहीं पड़ेगा – न तो यह बढ़ेगी और न घटेगी।
RBI ने बनाई सतर्कता की रणनीति
बीते तीन बैठकों में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कटौती की थी, लेकिन इस बार किसी बदलाव से बचते हुए RBI ने सतर्क रुख अपनाया है। गवर्नर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। त्योहारी सीजन के चलते आर्थिक गतिविधियां तो बढ़ रही हैं, लेकिन RBI किसी जल्दबाजी के मूड में नहीं है।
क्या होता है रेपो रेट और क्यों है यह जरूरी?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब रेपो रेट कम होता है तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वे ग्राहकों को भी सस्ते ब्याज दरों पर लोन देते हैं। वहीं रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब है कि मौजूदा होम लोन, पर्सनल लोन या ऑटो लोन पर EMI में कोई बदलाव नहीं होगा।
GDP ग्रोथ अनुमान 6.5% पर स्थिर
RBI ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर भरोसा जताया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि FY26 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.5% पर स्थिर रखा गया है। तिमाही आधार पर Q1 में 6.5%, Q2 में 6.7%, Q3 में 6.6% और Q4 में 6.3% ग्रोथ रहने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष में रियल GDP ग्रोथ 6.6% तक पहुंच सकती है।
महंगाई पर राहत, लेकिन सतर्कता जरूरी
महंगाई को लेकर RBI ने कहा कि FY26 में खुदरा महंगाई नियंत्रित दायरे में रहेगी। कोर महंगाई के 3.1% रहने का अनुमान जताया गया है, जो कि जून के 3.7% से कम है। हालांकि, साल के अंत में इसमें थोड़ी बढ़त हो सकती है और यह 4% के पार जा सकती है। फिलहाल जुलाई में रिटेल महंगाई 3.54% पर आ चुकी है, जो सितंबर 2019 के बाद सबसे निचला स्तर है।
फॉरेक्स रिजर्व $689 अरब के पार
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दिखाते हुए RBI ने बताया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार $688.9 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है। यह देश के लगभग 11 महीने के आयात खर्च को कवर कर सकता है। इससे भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति में मजबूती का संकेत मिलता है।
बैंकिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर में भी मजबूती
FY25 में भले ही बैंकिंग सेक्टर की ग्रोथ थोड़ी धीमी पड़ी हो, लेकिन कुल वित्तीय प्रवाह (Financial Flow) में मजबूती देखने को मिली है। इसके साथ ही भारत की ग्लोबल सर्विस एक्सपोर्ट में हिस्सेदारी अब 4% के पार पहुंच चुकी है, जो एक बड़ा संकेत है भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत का।
स्थिरता और संतुलन की नीति पर RBI
इस बार की MPC बैठक से साफ है कि RBI मौजूदा आर्थिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थिरता और संतुलन की नीति पर चल रहा है। रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला आम जनता के लिए राहत भरा है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से ही कर्ज चुका रहे हैं। आने वाले महीनों में RBI के कदम देश की आर्थिक दिशा तय करने में अहम साबित होंगे।
