पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने गुरुवार को सभी पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं से पार्टी में वापस लौटने की भावुक अपील की है। यह अपील उन्होंने अकाल तख्त साहिब के एकता के आह्वान के बाद की।
“मैं सिर झुकाकर विनती करता हूं”
सुखबीर बादल ने कहा, “मैं अकाल तख्त के सामने सिर झुकाता हूं। हर सिख का फर्ज है कि वह सिंह साहिबान (पांच उच्च सिख पुजारियों) के आदेशों का पालन करे। मैं उन सभी साथियों से हाथ जोड़कर कहता हूं, जो किसी कारणवश नाराज होकर पार्टी से अलग हो गए या कोई नया गुट बना लिया – अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर पंथ और पंजाब के लिए एक हो जाएं।”
उन्होंने कहा कि अगर कभी उनके किसी शब्द या काम से किसी साथी की भावनाएं आहत हुई हों, तो वे माफी मांगते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा, “यह वक्त पुरानी बातें भूलकर साथ चलने का है।”
अकाल तख्त का संदेश: एकजुट हो पंथ
बादल की यह अपील सिंह साहिबान द्वारा जारी निर्देश के बाद आई है, जिसमें उन्होंने सभी अकाली और पंथिक गुटों से एकता बनाए रखने की बात कही थी। दिसंबर 2024 में जारी इस निर्देश में कहा गया था कि सिख पहचान, पंजाब की जमीन और धार्मिक प्रतीकों की रक्षा के लिए सभी गुटों को एक मंच पर आना चाहिए।
इसमें यह भी चेतावनी दी गई थी कि जो गुट साथ नहीं आना चाहते, वे अपनी राजनीतिक राह तो चुन सकते हैं, लेकिन सिख संगत को भ्रमित न करें और झूठा दावा न करें कि वे अकाल तख्त का प्रतिनिधित्व करते हैं।
SAD को फूट का नुकसान
पिछले कुछ सालों में SAD के कई पुराने और अनुभवी नेता पार्टी से अलग हो गए थे। कुछ ने नई पार्टियां बनाई तो कुछ ने स्वतंत्र रूप से काम करना शुरू कर दिया। इस बिखराव से अकाली दल को न केवल जनता का समर्थन खोना पड़ा, बल्कि चुनावों में भी हार का सामना करना पड़ा।
सुखबीर बादल का मानना है कि अगर पुराने साथी लौट आते हैं, तो अकाली दल एक बार फिर से पंजाब की राजनीति में मजबूती से वापसी कर सकता है।
“अब पंथ और पंजाब की भलाई के लिए साथ आएं”
बादल ने साफ कहा कि यह समय किसी व्यक्तिगत नाराजगी या अहंकार का नहीं है, बल्कि पंथ और पंजाब की भलाई के लिए मिलकर काम करने का है। उन्होंने कहा, “अगर हम सब एक हो जाएं, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं लगेगी।”
उन्होंने कहा कि अकाल तख्त केवल किसी एक गुट या इलाके का नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के सिख समुदाय का सर्वोच्च स्थान है। उसका सम्मान करना हर सिख का कर्तव्य है।
क्या होगी SAD की अगली दिशा?
सुखबीर बादल की यह पहल आने वाले समय में SAD की राजनीति को नई दिशा दे सकती है। अगर सभी पुराने नेता वर्कर वापस लौटते हैं, तो यह पार्टी के लिए एक नई शुरुआत होगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि अकाली दल के पुराने साथी इस अपील पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या पंजाब की राजनीति में फिर से SAD की मजबूत वापसी हो पाएगी।
