कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने चुनाव आयोग पर फर्जी वोटिंग को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब उनकी पार्टी ने इतने बड़े स्तर पर फर्जी वोटरों का खुलासा किया है, तो चुनाव आयोग को इसकी जांच करनी चाहिए, न कि सिर्फ एफिडेविट पर हस्ताक्षर मांगने की बात करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया, “जब हम संसद में शपथ लेते हैं तो उससे बड़ी और कौन सी शपथ होती है? हम तो सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं और सबूत भी दिखा रहे हैं।”
धरातल पर दिख रही गड़बड़ी, फिर क्यों नहीं हो रही जांच?
प्रियंका ने कहा कि उनके पास 40 हजार से ज्यादा फर्जी वोटरों के सबूत हैं, फिर भी चुनाव आयोग चुप है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की नाक के नीचे इतना बड़ा खेल चल रहा है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा, “जब विपक्ष पर ईडी के छापे पड़ सकते हैं, तो इस पर जांच क्यों नहीं हो सकती?” उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ किसी पार्टी की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बात है, और इसे मजाक नहीं बनने देना चाहिए।
राहुल गांधी का बड़ा आरोप: “वोट चोरी लोकतंत्र पर एटम बम”
इससे पहले राहुल गांधी ने भी निर्वाचन आयोग पर बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली का आरोप लगाया था। उन्होंने कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का हवाला देते हुए कहा कि वहां 1 लाख से अधिक फर्जी वोटर पाए गए हैं। उनका दावा है कि यह “संविधान के खिलाफ एक अपराध” है और इस मामले में न्यायपालिका को भी हस्तक्षेप करना चाहिए।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
राहुल गांधी ने जो आंकड़े पेश किए, उनके अनुसार:
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1,00,250 वोट चोरी हुए
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11,965 डुप्लीकेट वोटर पाए गए
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40,009 मतदाताओं के पते अमान्य निकले
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10,452 वोटर एक ही पते पर दर्ज
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4,132 फर्जी फोटो के साथ वोटर सूची में
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33,692 वोटर फॉर्म-6 के दुरुपयोग से जोड़े गए
राहुल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए इसे “वोट-चोरी लोकतंत्र पर एटम बम” बताया।
कांग्रेस की मांग: हो निष्पक्ष और पारदर्शी जांच
कांग्रेस पार्टी का कहना है कि उसने जो साक्ष्य इकट्ठा किए हैं, वे आपराधिक धोखाधड़ी को साबित करते हैं। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग न सिर्फ इन तथ्यों को नजरअंदाज कर रहा है, बल्कि देशभर में ऐसे सबूतों को मिटाने में जुटा है।
गठबंधन में मंथन, अगली रणनीति पर विचार
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि विपक्षी गठबंधन इस मुद्दे को लेकर जल्द ही आपस में चर्चा करेगा और यह तय करेगा कि आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए। लेकिन इतना तय है कि मामला अब तूल पकड़ चुका है और इसमें गंभीर गड़बड़ी के संकेत साफ नजर आ रहे हैं।
