पंजाब सरकार ने तहसील और सब-तहसील दफ्तरों में लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य के राजस्व, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन विभाग (स्टैंप और रजिस्ट्रेशन ब्रांच) ने सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को आदेश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में तैनात टेक्निकल असिस्टेंट्स और सेवादारों का तुरंत तबादला सुनिश्चित करें।
लंबे समय से एक ही जगह पर जमे कर्मचारी सवालों के घेरे में
सरकार का कहना है कि कई तकनीकी सहायक और सेवादार सालों से एक ही जगह पर तैनात हैं, जिससे उन्होंने स्थानीय दलालों, प्रॉपर्टी डीलरों और अन्य कर्मचारियों से गठजोड़ बना लिया है। इस गठजोड़ के चलते आम जनता को अपने जरूरी काम करवाने के लिए भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का सामना करना पड़ता है।
भ्रष्टाचार की जड़ को हटाने की कोशिश
विभाग द्वारा दिए गए आदेश में साफ किया गया है कि ऐसी स्थायी तैनाती ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है। इसलिए निर्देश दिया गया है कि इन कर्मचारियों को वहां दोबारा तैनात न किया जाए, जहां वे पहले से तैनात रह चुके हों। इसके अलावा, बड़े स्टेशनों पर तैनात कर्मचारियों को छोटी तहसीलों में भेजने की प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पुराने गठजोड़ से बचाने के लिए सख्त हिदायत
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि तहसीलदार और नायब तहसीलदार कार्यालयों में पहले से तैनात कर्मचारियों को फिर से वहीं नियुक्त करने पर सख्त पाबंदी होगी। ऐसे कर्मचारियों को अन्य तहसीलों में भेजा जाएगा ताकि वे अपने पुराने गठजोड़ का फायदा उठाकर भ्रष्ट गतिविधियों को अंजाम न दे सकें।
ई-गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में कदम
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब सरकार ‘ईज़ी रजिस्ट्रेशन’, ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड और पोर्टल्स जैसी डिजिटल प्रणालियों को लागू करने में जुटी है। लेकिन ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे भ्रष्ट कर्मचारियों के कारण इन तकनीकी प्रयासों को झटका लग रहा था। सरकार का यह फैसला ई-गवर्नेंस की पारदर्शिता और भरोसे को बढ़ावा देने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
सरकार का यह सख्त निर्णय दर्शाता है कि वह प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता को लेकर गंभीर है। उम्मीद की जा रही है कि इस कदम से तहसीलों में जनता को बेहतर और भ्रष्टाचार मुक्त सेवाएं मिलेंगी।
