एयरलाइन कंपनी इंडिगो को अब यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं पर और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कंपनी को एक महिला यात्री को ₹1.5 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है। आयोग ने यह फैसला सेवा में कमी और यात्री को असुविधा पहुंचाने के मामले में सुनाया है।
2 जनवरी की उड़ान में हुआ विवाद
शिकायतकर्ता पिंकी नाम की महिला ने बताया कि 2 जनवरी 2025 को वह बाकू से नई दिल्ली आ रही थी। इस दौरान इंडिगो की फ्लाइट में उन्हें एक “गंदी और दागदार” सीट दी गई। उन्होंने तुरंत इस बारे में फ्लाइट क्रू और कंपनी से शिकायत की, लेकिन एयरलाइन ने उनकी बात को नज़रअंदाज़ कर दिया और असंवेदनशील रवैया अपनाया।
कंपनी का दावा और आयोग का रुख
सुनवाई के दौरान इंडिगो ने आयोग को बताया कि उन्होंने महिला की शिकायत का संज्ञान लिया था और उन्हें दूसरी सीट अलॉट की गई, जिस पर उन्होंने यात्रा पूरी की। लेकिन आयोग ने सबूतों और दस्तावेज़ों के आधार पर इस दावे को खारिज कर दिया। आयोग ने माना कि महिला को शुरू से ही असुविधा का सामना करना पड़ा और एयरलाइन की जिम्मेदारी थी कि वह यात्रियों को स्वच्छ और आरामदायक सीट मुहैया कराए।
मुआवज़ा और कानूनी खर्च का आदेश
दिए गए फैसले में आयोग की चेयरपर्सन पूनम चौधरी, सदस्य बारिक अहमद और सदस्य शेखर चंद्र ने कहा कि इंडिगो सेवा में कमी का दोषी है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि वह महिला को मानसिक, शारीरिक पीड़ा और असुविधा के लिए ₹1.5 लाख का मुआवज़ा दे। इसके अलावा ₹25,000 कानूनी खर्च के रूप में भी अदा करने के निर्देश दिए गए।
यात्रियों के अधिकारों की जीत
यह मामला उन सभी यात्रियों के लिए एक मिसाल है, जो सफर के दौरान असुविधा का सामना करते हैं लेकिन शिकायत करने के बाद भी उन्हें समाधान नहीं मिलता। आयोग का यह फैसला एयरलाइनों के लिए चेतावनी है कि यात्री सुविधा और स्वच्छता पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
