भारत के आयकर कानून में 64 साल बाद एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 11 अगस्त 2025 को लोकसभा में आयकर विधेयक 2025 पेश किया, जिसे सिर्फ 4 मिनट में पास कर दिया गया। यह विधेयक आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा। हालांकि, इसे अब राज्यसभा से मंजूरी और राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलना बाकी है, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा।
नए कानून की तैयारी में लंबा मंथन
नए विधेयक को तैयार करने के लिए सरकार ने एक चयन समिति बनाई थी, जिसने करीब 4 महीने तक इस पर काम किया। समिति ने 285 सुझावों वाली 4,500 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसके आधार पर संशोधन किए गए और अंततः 535 धाराओं और 16 शेड्यूल्स वाला नया विधेयक तैयार हुआ।
सरल भाषा पर जोर
इस नए विधेयक में सबसे बड़ा बदलाव इसकी भाषा को सरल और समझने योग्य बनाना है। सरकार का उद्देश्य है कि आम आदमी भी बिना किसी कानूनी मदद के कानून को समझ सके। जटिल कानूनी शब्दों और उलझी हुई परिभाषाओं को हटाकर आसान शब्दों का प्रयोग किया गया है।
नए शब्द का प्रयोग
पारंपरिक आयकर कानून में इस्तेमाल होने वाले ‘पिछला वर्ष’ और ‘मूल्यांकन वर्ष’ जैसे शब्द आम लोगों के लिए अक्सर भ्रम पैदा करते थे। नए विधेयक में इनकी जगह ‘टैक्स वर्ष’ शब्द को शामिल किया गया है, जिससे करदाता आसानी से अपने वित्तीय वर्ष को समझ सकेंगे।
CBDT को ज्यादा शक्तियां
विधेयक में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) को अधिक अधिकार दिए गए हैं। इसका मकसद है कि बोर्ड बदलते समय और डिजिटल अर्थव्यवस्था की जरूरतों के हिसाब से त्वरित नियम बना सके। साथ ही, कर प्रणाली को पारदर्शी और आधुनिक बनाने पर जोर दिया गया है।
विवाद कम करने पर फोकस
नए विधेयक का सबसे बड़ा उद्देश्य है पुराने, उलझे और अस्पष्ट नियमों को हटाकर एक साफ-सुथरी और स्पष्ट कर व्यवस्था लागू करना। सरकार का मानना है कि इससे कर विवादों की संख्या में कमी आएगी और करदाता को बेहतर अनुभव मिलेगा।
क्यों है यह बदलाव अहम?
आयकर अधिनियम 1961 पिछले छह दशकों से लागू है, लेकिन बदलती अर्थव्यवस्था, डिजिटलीकरण और वैश्विक मानकों के कारण इसमें कई खामियां और जटिलताएं आ गई थीं। नए विधेयक के जरिए भारत एक आधुनिक, आसान और निवेशक-हितैषी कर ढांचा तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है।
