भारत और अमेरिका के रिश्तों में इस समय तनाव साफ नज़र आ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने का बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले ने न केवल भारत-अमेरिका के संबंधों को झटका दिया है, बल्कि अमेरिका के भीतर भी विरोध की आवाजें उठने लगी हैं।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप के आर्थिक सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने दावा किया कि भारत को असल में रूसी तेल की ज़रूरत नहीं है। नवारो का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले भारत ने रूस से तेल की खरीदारी नहीं की थी, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रूस से सस्ते दाम पर तेल ले रहा है और इसे रिफाइन करके मुनाफाखोरी कर रहा है। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि भारत की यह नीति अप्रत्यक्ष तौर पर युद्ध को बढ़ावा दे रही है।
नवारो ने टैरिफ बढ़ाने के ट्रंप के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि भारत पर लगाया गया शुल्क पूरी तरह उचित है। उनके मुताबिक, यह कदम भारत को ‘सख्त संदेश’ देने के लिए ज़रूरी है।
टैरिफ पर अमेरिका में ही बंटे सुर
हालांकि ट्रंप का यह फैसला उनके अपने ही देश में आलोचना का शिकार हो रहा है। रिपब्लिकन पार्टी की वरिष्ठ नेता और दक्षिण कैरोलिना की पूर्व गवर्नर निक्की हेली ने इस कदम को गलत ठहराया है। हेली का कहना है कि टैरिफ नीति से भारत और अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे भरोसेमंद रिश्तों पर गहरा असर पड़ेगा।
निक्की हेली ने यह भी सुझाव दिया कि ट्रंप को भारत के साथ जल्द से जल्द रिश्ते सुधारने चाहिए, क्योंकि भारत न केवल एशिया बल्कि वैश्विक मंच पर अमेरिका का अहम सहयोगी रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह तनाव बढ़ा तो चीन और रूस को इसका फायदा मिल सकता है।
भारत पर सख्ती, चीन को राहत
इस पूरे विवाद में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने जहां भारत पर भारी टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है, वहीं चीन और पाकिस्तान को इस मामले में काफी राहत दी है। यह स्थिति सवाल खड़े करती है, क्योंकि चीन भी रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीद रहा है।
ट्रंप सरकार का कहना है कि भारत पर फिलहाल 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया गया है और बाकी 25 प्रतिशत 27 अगस्त से लागू होगा। यानी आने वाले दिनों में भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात और महंगा हो जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते और तनावपूर्ण हो सकते हैं।
रिश्तों पर असर
भारत और अमेरिका के बीच बीते दो दशकों में गहरी साझेदारी देखने को मिली है। चाहे सुरक्षा का मामला हो, व्यापार या तकनीक का क्षेत्र—दोनों देश एक-दूसरे के सहयोगी माने जाते रहे हैं। लेकिन हाल के फैसले से यह भरोसा कमजोर होता दिख रहा है।
भारत के रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका को भारत पर टैरिफ लगाने के बजाय बातचीत के ज़रिए समस्या का हल ढूंढना चाहिए। वहीं अमेरिकी विश्लेषकों का कहना है कि अगर भारत और अमेरिका के बीच खींचतान लंबी चली तो इसका असर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा रणनीति पर भी पड़ सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ फैसले ने भारत-अमेरिका रिश्तों को मुश्किल दौर में ला खड़ा किया है। सलाहकार नवारो जहां भारत पर लगातार आरोप लगा रहे हैं, वहीं अमेरिका के भीतर ही इस नीति का विरोध हो रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों देश इस विवाद को सुलझाकर फिर से पुराने भरोसेमंद रिश्ते बहाल कर पाते हैं या नहीं।
