22 अगस्त को भारतीय शेयर बाज़ार में भारी बिकवाली देखी गई। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 693.86 अंक गिरकर 81,306.85 पर और निफ्टी 213.65 अंक टूटकर 24,870.10 पर बंद हुआ। लगातार छह दिनों की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू की, जिससे बाजार दबाव में आ गया।
मुनाफा बुकिंग से आई गिरावट
विशेषज्ञों का कहना है कि बीते हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार बढ़त दर्ज की जा रही थी। इस तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा बुक करना शुरू किया। सबसे ज्यादा असर बैंकिंग और आईटी स्टॉक्स पर पड़ा। HDFC बैंक और ICICI बैंक जैसे बड़े शेयरों में बिकवाली देखी गई, जिससे सूचकांकों पर सीधा दबाव आया।
जेरोम पावेल के भाषण से पहले घबराहट
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पावेल आज शाम जैक्सन होल कॉन्फ्रेंस में भाषण देने वाले हैं। इस भाषण से अमेरिकी मौद्रिक नीति की दिशा को लेकर अहम संकेत मिलने की उम्मीद है। HDFC सिक्योरिटीज के प्रमुख शोधकर्ता देवर्षी वकील ने कहा, “बाजार की कमजोरी का सबसे बड़ा कारण यही भाषण है। निवेशक सतर्क हैं और अनिश्चितता के बीच मुनाफा वसूली कर रहे हैं।”
अमेरिकी टैरिफ को लेकर चिंता
निवेशकों की धारणा को कमजोर करने वाला एक और कारण है अमेरिका द्वारा भारत पर 27 अगस्त से लागू होने वाला 25% अतिरिक्त टैरिफ। Geojit Investments के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा कि अगर यह टैरिफ लागू हुआ तो भारत की GDP ग्रोथ पर 20-30 आधार अंक का असर पड़ सकता है। इसका सीधा असर बाजार की चाल पर भी देखने को मिला है।
रुपये में कमजोरी
विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखा गया। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 11 पैसे गिरकर 87.36 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि विदेशी निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने रुपये को बड़ी गिरावट से बचा लिया।
अमेरिका की सख्त टिप्पणी ने बढ़ाई बेचैनी
व्हाइट हाउस के वाणिज्य सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर फिर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत रूस से तेल खरीदकर लाभ कमा रहा है और भारत को रूस का “लॉन्ड्रोमैट” करार दिया। नवारो ने यह भी साफ कर दिया कि 27 अगस्त से भारतीय वस्तुओं पर सेकेंडरी टैरिफ लागू होंगे और समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। इस बयान ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया।
विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल बाजार की चाल पूरी तरह से जेरोम पावेल के भाषण और अमेरिकी टैरिफ नीति पर निर्भर करेगी। अगर फेड चेयरमैन ब्याज दरों में नरमी का संकेत देते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं, टैरिफ लागू होने पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बढ़ सकती है।
