संसद से पारित होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑनलाइन मनी गेमिंग पर रोक लगाने वाले बिल को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह बिल अब कानून का रूप ले चुका है। इस कानून के तहत सभी तरह की ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू होगा।
तीन साल की सजा और भारी जुर्माना
नए कानून में साफ प्रावधान किया गया है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाएं उपलब्ध कराता है तो उस पर तीन साल तक की कैद और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं ऐसे गेम्स की विज्ञापनबाजी करने वालों पर भी कार्रवाई होगी। उन्हें दो साल तक की सजा और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
संसद में उठी चिंता
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा था कि लोग ऑनलाइन मनी गेमिंग में अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी गंवा रहे हैं। उन्होंने कहा, “समय-समय पर समाज को कुछ बुराइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार और संसद का दायित्व है कि वह ऐसे मामलों पर कानून बनाकर उन्हें नियंत्रित करे।”
पीएम मोदी ने किया समर्थन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बिल का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि यह कानून एक तरफ जहां ई-खेलों (E-Sports) को बढ़ावा देगा, वहीं दूसरी ओर ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों के दुष्प्रभावों से समाज की रक्षा करेगा।
कंपनियों ने बंद किए अपने प्लेटफॉर्म
बिल पास होने के बाद कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने अपने काम बंद करने का ऐलान कर दिया है। इनमें प्रमुख प्लेटफॉर्म Dream11 और Winzo शामिल हैं। इन कंपनियों ने कहा है कि अब वे इस नए कानून के तहत अपनी सेवाएं उपलब्ध नहीं कराएंगी।
IT सचिव ने दी जानकारी
राष्ट्रपति की मंजूरी से पहले आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा था कि यह ऐसा कानून है जिसे बिना देरी के लागू करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सरकार यह भी विचार कर रही है कि कुछ प्रावधानों को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए, ताकि पाबंदी को और सख्ती से लागू किया जा सके।
समाज को मिलेगा बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून से न केवल आर्थिक धोखाधड़ी और ठगी पर रोक लगेगी, बल्कि युवाओं और बच्चों को भी लत से बचाने में मदद मिलेगी। सरकार का दावा है कि यह कदम नशे की तरह फैल रहे ऑनलाइन गेमिंग के दुष्प्रभावों को खत्म करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा।
