आज के डिजिटल जमाने में मोबाइल ऐप और नेट बैंकिंग के जरिए पैसे ट्रांसफर करना बेहद आसान हो चुका है। खासकर UPI ने लोगों को मुफ्त और तेज़ लेन-देन की आदत डाल दी है। लेकिन अब IMPS (Immediate Payment Service) का इस्तेमाल करने वालों की जेब पर ज्यादा बोझ पड़ने वाला है।
IMPS क्या है?
IMPS एक रीयल-टाइम फंड ट्रांसफर सेवा है, जिसकी मदद से कोई भी व्यक्ति तुरंत किसी भी बैंक खाते में पैसे भेज सकता है। यह सेवा 24×7 उपलब्ध है और पहले बैंकों की तरफ से इस पर बहुत कम या शून्य शुल्क लिया जाता था। लेकिन अगस्त 2025 से कई बड़े बैंकों ने इसके चार्ज बढ़ा दिए हैं।
किन बैंकों ने बढ़ाए चार्ज?
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को छोड़कर कई प्रमुख बैंकों ने IMPS ट्रांजैक्शन पर नई दरें लागू कर दी हैं। इनमें केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और निजी क्षेत्र का HDFC बैंक शामिल हैं। नई दरें अगस्त 2025 से लागू हो चुकी हैं।
IMPS से अब कितना पैसा भेज सकते हैं?
IMPS के जरिए अब आप एक दिन में अधिकतम 5 लाख रुपये तक ट्रांसफर कर सकते हैं। पहले यह सीमा कम थी, लेकिन अब इसे बढ़ा दिया गया है। हालांकि, बड़ी रकम भेजने पर अब ग्राहकों को पहले से ज्यादा शुल्क चुकाना पड़ेगा।
केनरा बैंक के नए चार्ज
केनरा बैंक ने अपने ग्राहकों के लिए नई स्लैब दरें तय की हैं।
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1000 रुपये तक का ट्रांसफर – कोई शुल्क नहीं
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1001 से 10,000 रुपये तक – मामूली शुल्क
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10,001 से 1 लाख रुपये तक – तयशुदा चार्ज
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1 लाख से 5 लाख रुपये तक – अधिक शुल्क लागू
(नोट: बैंक की तरफ से हर स्लैब के हिसाब से अलग-अलग चार्ज तय किए गए हैं, जिन्हें शाखा या बैंक की वेबसाइट पर देखा जा सकता है।)
PNB और HDFC ने भी बदले नियम
PNB और HDFC ने भी IMPS ट्रांजैक्शन पर नई फीस लागू कर दी है। पहले ये बैंक छोटी रकम पर शुल्क नहीं लेते थे, लेकिन अब हर ट्रांजैक्शन पर स्लैब के अनुसार चार्ज काटा जाएगा।
UPI से तुलना
जहां UPI पर अभी तक लेन-देन बिल्कुल मुफ्त है, वहीं IMPS पर शुल्क वसूला जाना ग्राहकों के लिए नया अनुभव होगा। ऐसे में जिन लोगों को बड़ी रकम ट्रांसफर करनी होती है, उन्हें UPI की बजाय IMPS ही इस्तेमाल करना होगा, लेकिन इसके लिए उन्हें अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।
ग्राहकों के लिए जरूरी जानकारी
बैंक विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राहक किसी भी लेन-देन से पहले बैंक द्वारा जारी नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें। कई बार ऑनलाइन ट्रांसफर करते समय यह जानकारी छूट जाती है और बाद में ग्राहकों को लगे हुए शुल्क देखकर परेशानी होती है।
