देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले पाँच से सात दिनों तक कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव वाला क्षेत्र और पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) इसके मुख्य कारण हैं। इस दौरान कई इलाकों में तेज़ हवाओं के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
उत्तरी भारत में बारिश का असर
जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अगले एक हफ़्ते तक लगातार बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। 29 अगस्त से 1 सितंबर के बीच उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में अत्यधिक बारिश हो सकती है। इससे मैदानी क्षेत्रों में जलभराव और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
मध्य और पूर्वी राज्यों में भी झमाझम
छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र में भी अगले पाँच से सात दिन तक बारिश का सिलसिला थमने वाला नहीं है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इन इलाकों में लगातार हो रही बारिश से नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है। खासकर झारखंड और बिहार के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने का डर है।
पश्चिमी भारत में अलर्ट
गुजरात, कोंकण, गोवा और महाराष्ट्र में भी अगले कुछ दिनों तक तेज़ बारिश का पूर्वानुमान है। महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में 27 और 28 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके कारण पहाड़ी सड़कों पर फिसलन और यातायात प्रभावित होने की आशंका है।
दक्षिण और उत्तर-पूर्व भारत में भी बरसेंगे बादल
दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी अगले कुछ दिनों तक झमाझम बारिश का दौर रहेगा। वहीं, उत्तर-पूर्व के असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 31 अगस्त तक लगातार बारिश की चेतावनी दी गई है। इन इलाकों में तेज़ बारिश के साथ-साथ भूस्खलन की स्थिति भी बन सकती है।
वजह क्या है?
मौसम विशेषज्ञ बताते हैं कि बंगाल की खाड़ी में कम दबाव वाला क्षेत्र बन चुका है, जो अगले दो दिनों में और मज़बूत हो सकता है। इसके अलावा, चक्रवाती हवाओं का असर और पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है। यही कारण है कि देश के इतने बड़े हिस्से में मानसून ने दोबारा जोर पकड़ लिया है।
लोगों को सावधानी बरतने की सलाह
मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि नदियों और नालों के पास अनावश्यक रूप से न जाएँ। पहाड़ी राज्यों में यात्रा करने से पहले मौसम की स्थिति की जानकारी लें। जिन इलाकों में जलभराव की संभावना है, वहाँ प्रशासन ने पहले से ही राहत दलों को तैयार रखा है।
