जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मंगलवार (26 अगस्त) को माता वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले मार्ग पर बड़ा हादसा हुआ। त्रिकुटा पहाड़ियों पर भूस्खलन के कारण चट्टानें और पत्थर गिर पड़े, जिसकी चपेट में आकर कई लोग मारे गए। अब तक कम से कम 30 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें नौ तीर्थयात्री सीधे भूस्खलन की चपेट में आए। करीब 21 लोग घायल हैं और कई के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
कैसे हुआ हादसा?
कटरा से मंदिर तक जाने वाले 12 किलोमीटर लंबे मार्ग के बीच में यह हादसा हुआ। दोपहर करीब 3 बजे अर्धकुंवारी के पास इंद्रप्रस्थ भोजनालय के नजदीक अचानक भारी मलबा गिरा। उस समय सैकड़ों श्रद्धालु ऊपर-नीचे आ-जा रहे थे। बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
यात्रा स्थगित
भारी बारिश और हादसे को देखते हुए वैष्णो देवी यात्रा फिलहाल रोक दी गई है। सुबह से ही हिमकोटि मार्ग पर यात्रा स्थगित कर दी गई थी, लेकिन पुराने रास्ते से तीर्थयात्रा दोपहर 1.30 बजे तक जारी रही। इसके बाद सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने दोनों मार्ग बंद कर दिए।
बारिश से व्यापक तबाही
सिर्फ कटरा ही नहीं, बल्कि पूरे जम्मू क्षेत्र और कश्मीर घाटी में बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया है।
- कई पुल बह गए और गांवों का संपर्क टूट गया।
- बिजली के खंभे और मोबाइल टावर गिरने से टेलीकॉम सेवाएं ठप हो गईं। लाखों लोग नेटवर्क से बाहर हो गए।
- जम्मू-श्रीनगर और किश्तवाड़-डोडा राष्ट्रीय राजमार्ग बंद कर दिए गए हैं।
- पहाड़ी इलाकों में कई सड़कें भूस्खलन से अवरुद्ध हो गई हैं।
रेल और यातायात पर असर
जम्मू आने-जाने वाली कई ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। बस और अन्य साधन भी प्रभावित हुए हैं। यात्रियों को जहां-तहां फंसा देखा जा रहा है।
राहत और बचाव
एनडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मलबा हटाने और फंसे लोगों को निकालने के लिए जुटी हैं। अर्धकुंवारी क्षेत्र में लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। बारिश जारी रहने से राहत कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं।
श्रद्धालुओं के लिए संदेश
अधिकारियों ने अपील की है कि अभी कोई भी तीर्थयात्री यात्रा शुरू न करे। मौसम सुधरने और मार्ग सुरक्षित होने के बाद ही यात्रा बहाल की जाएगी।
