पंजाब सरकार और प्रशासन की सक्रिय भूमिका के चलते पिछले 24 घंटों में बाढ़ प्रभावित इलाकों से कुल 4711 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें फिरोजपुर के 812, गुरदासपुर के 2571, मोगा के 4, तरनतारन के 60, बरनाला के 25 और फाजिल्का के 1239 लोग शामिल हैं।
अब तक 11,330 लोग हुए सुरक्षित
विभिन्न जिलों से मिली रिपोर्टों के मुताबिक अब तक 9 जिलों के 11,330 लोगों को बाढ़ के पानी से बचाया जा चुका है। इसमें गुरदासपुर के 4771, फिरोजपुर के 2819, पठानकोट के 1100, होशियारपुर के 1052, फाजिल्का के 1239, कपूरथला के 240, मोगा के 24, तरनतारन के 60 और बरनाला के 25 लोग शामिल हैं।
77 राहत कैंपों में ठहरे 4729 लोग
राज्यभर में बाढ़ प्रभावित इलाकों में 87 राहत कैंप बनाए गए हैं, जिनमें से फिलहाल 77 सक्रिय हैं। इन कैंपों में इस समय 4729 लोग ठहरे हुए हैं। अकेले फिरोजपुर के 8 कैंपों में 3450 लोग रह रहे हैं। होशियारपुर के 20 कैंपों में 478, पठानकोट के 14 कैंपों में 411 और कपूरथला के 4 कैंपों में 110 लोग शरण लिए हुए हैं।
राहत सामग्री का वितरण जारी
प्रशासन की ओर से प्रभावित जिलों में लगातार राहत सामग्री बांटी जा रही है। कपूरथला में 15, 27, 28 और 29 अगस्त को बड़ी मात्रा में सामान वितरित किया गया। इसी तरह गुरदासपुर, फिरोजपुर, मोगा, पठानकोट, फाजिल्का और बरनाला में भी ज़रूरत के हिसाब से सामान पहुंचाया जा रहा है।
NDRF-SDRF और सेना मोर्चे पर
बाढ़ राहत कार्यों में NDRF, SDRF, पंजाब पुलिस और सेना लगातार जुटी हुई है। गुरदासपुर में NDRF की 7 टीमें, फिरोजपुर और फाजिल्का में 1-1 टीम और पठानकोट में 2 टीमें काम कर रही हैं। वहीं कपूरथला में SDRF की 2 टीमें सक्रिय हैं। सेना, BSF और एयरफोर्स ने भी कई जिलों में मोर्चा संभाल रखा है।
1018 गांव बाढ़ से प्रभावित
पंजाब में अब तक कुल 1018 गांव बाढ़ की चपेट में आए हैं। इनमें गुरदासपुर के 323, कपूरथला के 107, फिरोजपुर के 101, होशियारपुर के 85, पठानकोट के 81, फाजिल्का के 52, तरनतारन के 45, श्री मुक्तसर साहिब के 64, संगरूर के 22 और मोगा के 35 गांव शामिल हैं।
फसलों और पशुधन को भारी नुकसान
बाढ़ ने पंजाब की खेती को भी बड़ा झटका दिया है। फाजिल्का में 16,632 हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसलें बर्बाद हुई हैं। इसी तरह फिरोजपुर में 10,806 हेक्टेयर, कपूरथला में 11,620, पठानकोट में 7,000, तरनतारन में 9,928 और होशियारपुर में 5,287 हेक्टेयर भूमि पर फसल को नुकसान पहुंचा है। साथ ही पशुधन का भी काफी नुकसान हुआ है।
