पंजाब इस समय बाढ़ के भीषण संकट से गुजर रहा है। लगातार हो रही बारिश और नदियों के उफान ने लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी है। रावी, ब्यास और सतलुज जैसी नदियां शनिवार को भी उफान पर रहीं। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नदियों के किनारे बसे गांवों पर पड़ा है, जहां घर, खेत और पशुधन सभी पानी में डूब गए।
23 लोगों की मौत, हजारों प्रभावित
बीते पांच दिनों में राज्य के 7 जिलों में 23 लोगों की मौत बाढ़ की चपेट में आने से हो चुकी है। अब तक 1018 गांव पूरी तरह प्रभावित हैं और करीब 3 लाख एकड़ जमीन पानी में डूबकर बर्बाद हो गई है। अनुमान है कि इस आपदा में 10,000 से ज्यादा पशुओं की मौत हुई है।
सरकार का दावा: 11 हजार लोग सुरक्षित निकाले
पंजाब सरकार का कहना है कि राहत कार्यों के तहत अब तक 11,330 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। 1988 की बाढ़ की तुलना में इस बार हालात और ज्यादा खराब हैं। तब करीब 11 लाख क्यूसेक पानी ने तबाही मचाई थी, जबकि इस बार 15 लाख क्यूसेक से अधिक पानी ने माजहा और दोआबा इलाकों में तबाही मचा दी है।
सबसे ज्यादा प्रभावित जिले
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर पठानकोट, होशियारपुर, गुरदासपुर, तरनतारन, कपूरथला और फिरोजपुर जिलों में देखने को मिला है। इसके अलावा बरनाला, मोगा, कपूरथला और अमृतसर का भी कुछ हिस्सा प्रभावित है। हजारों लोग अब भी बेघर हैं और कई राहत कैंपों में रह रहे हैं।
87 राहत कैंपों में ठहरे हजारों लोग
सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 87 राहत कैंप स्थापित किए हैं, जिनमें इस समय 4729 लोग ठहरे हुए हैं। यहां उन्हें खाने-पीने से लेकर दवाइयों और रहने की अस्थायी व्यवस्था मुहैया कराई जा रही है।
डैमों से छोड़ा जा रहा पानी
लगातार बारिश और नदियों के उफान को देखते हुए डैमों से भी पानी छोड़ा गया है।
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गोबिंद सागर झील का जलस्तर 1672.12 फीट पर पहुंच गया, जहां से 54,076 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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पोंग डैम का स्तर 1391.05 फीट दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 11 फीट ऊपर है। यहां से 1,05,854 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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रणजीत सागर डैम का जलस्तर 524.96 मीटर रहा और यहां से 51,116 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
घग्गर, टांगरी और मारकंडा नदियां भी उफान पर
घग्गर, टांगरी और मारकंडा नदियों का जलस्तर सामान्य दिनों से 8 से 10 फीट ज्यादा दर्ज किया गया। हालांकि शनिवार को इन नदियों से किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई। वहीं, पटियाला जिले के देवीगढ़, भुनरहेड़ी और गुहला चीका के निचले इलाकों में लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी गई है।
