त्योहारों के सीज़न की शुरुआत से पहले ही फूड डिलीवरी कंपनी ज़ोमैटो ने ग्राहकों को झटका दे दिया है। कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म फीस में 20% का इज़ाफा कर दिया है। अब हर ऑर्डर पर ग्राहकों को 10 रुपये की बजाय 12 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। यह बदलाव देशभर के उन सभी शहरों में लागू कर दिया गया है जहां ज़ोमैटो अपनी सेवाएं देता है।
लगातार बढ़ रही है फीस
यह पहली बार नहीं है जब ज़ोमैटो ने चार्ज बढ़ाया हो। पिछले साल भी त्योहारों से पहले प्लेटफॉर्म फीस 6 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दी गई थी। उससे भी पहले, तीन महीने के भीतर ही फीस 5 रुपये से बढ़ाकर 6 रुपये की गई थी। यानी कंपनी लगातार हर कुछ महीनों में अपने ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।
स्विगी ने भी बढ़ाए दाम
ज़ोमैटो की टक्कर देने वाली दूसरी बड़ी फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी ने भी हाल ही में फीस बढ़ाई है। कुछ चुनिंदा शहरों में स्विगी ने प्लेटफॉर्म फीस 14 रुपये कर दी है। इससे साफ है कि त्योहारों के दौरान जब ऑर्डर की संख्या तेजी से बढ़ेगी, तो कंपनियां इस मौके का फायदा उठाकर अपनी कमाई बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।
कंपनी का तर्क—लागत और बाज़ार की मांग
ज़ोमैटो की ओर से कहा गया है कि बढ़ती लागत और बदलती बाज़ार की ज़रूरतों को देखते हुए यह कदम उठाना ज़रूरी था। त्योहारों के सीज़न में ऑर्डर की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनी मानती है कि प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाने से वह अपनी सेवाओं को सुचारू तरीके से बनाए रख सकेगी।
ग्राहकों पर सीधा असर
प्लेटफॉर्म फीस में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। अब हर ऑर्डर पर उन्हें ज्यादा भुगतान करना होगा। छोटे ऑर्डर करने वाले ग्राहकों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ेगी, क्योंकि कुल बिल का बड़ा हिस्सा अब प्लेटफॉर्म फीस के रूप में चला जाएगा।
त्योहारों के सीज़न में लोग वैसे ही अतिरिक्त खर्च करते हैं और अब फूड डिलीवरी पर बढ़ा हुआ चार्ज उनकी जेब और ढीली करेगा। ज़ोमैटो और स्विगी जैसी कंपनियों की यह रणनीति उनके मुनाफे को भले ही बढ़ा दे, लेकिन ग्राहकों के लिए यह कदम निश्चित रूप से निराशाजनक है।
