पंजाब और पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार बारिश ने स्थिति गंभीर बना दी है। सतलुज नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और जालंधर जिले में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे की निगरानी बढ़ा दी है और टीमें तैनात कर दी गई हैं। खासतौर पर फिल्लौर, शाहकोट और लोहियां में हालात नाजुक माने जा रहे हैं।
64 गांव प्रभावित, हाई अलर्ट जारी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जालंधर जिले के करीब 64 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जिले को हाई अलर्ट पर रखा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि मानसून अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है और सितंबर के दूसरे हफ्ते तक पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश और बादल फटने की घटनाएं हो सकती हैं। इसका सीधा असर सतलुज नदी के जलस्तर पर पड़ेगा।
10 गांवों को अलर्ट पर रखा गया
जालंधर प्रशासन ने नदी किनारे बसे लगभग 10 गांवों को विशेष अलर्ट पर रखा है। ग्रामीणों को लगातार चेतावनी दी जा रही है कि वे नदी के पास न जाएं और सुरक्षित ऊंचाई वाली जगहों पर रहें। हालांकि फिलहाल जालंधर शहर में बारिश की कोई चेतावनी नहीं है, लेकिन नदी के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है।
सौंगवाला और धुसी बांध पर दबाव
नदी किनारे बसे सौंगवाला और धुसी बांध के आसपास पानी का बहाव इतना तेज है कि प्रशासन और ग्रामीण मिलकर बांध को सुरक्षित रखने में लगे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पहाड़ों में बारिश का सिलसिला जारी रहा तो सतलुज का जलस्तर और अधिक बढ़ सकता है। इससे निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा और गहरा जाएगा।
सस्सराली डैम से बढ़ी चिंता
जालंधर और लुधियाना के बीच स्थित सस्सराली डैम ने भी प्रशासन की नींद उड़ा दी है। गुरुवार को सतलुज के तेज बहाव के कारण सस्सराली कॉलोनी के पास बांध का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। जैसे ही बांध की कमजोरी की जानकारी मिली, पंजाब के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
आगे का खतरा बरकरार
मौसम विभाग ने साफ कहा है कि पंजाब के मैदानी इलाकों में भी सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में जालंधर समेत पंजाब के कई निचले इलाके बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। फिलहाल प्रशासन अलर्ट पर है और लगातार लोगों को सावधानी बरतने की अपील कर रहा है।
