मंगलवार को घरेलू वायदा बाजार में सोने ने इतिहास रच दिया। MCX पर दिसंबर डिलिवरी वाला सोना 458 रुपये चढ़कर 1,10,047 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इसी तरह अक्टूबर डिलिवरी वाला सोना 482 रुपये बढ़कर 1,09,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और निवेशकों की बढ़ती खरीदारी ने इस तेजी को और मजबूती दी है।
चांदी भी आसमान छूने लगी
सोने के साथ-साथ चांदी ने भी अपना पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मंगलवार को चांदी 1,26,730 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। इससे पहले सोमवार को दिसंबर डिलिवरी वाली चांदी 1,703 रुपये बढ़कर 1,26,400 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई थी। यानी महज 24 घंटे में कीमती धातु ने एक और ऊंचाई छू ली।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी
तेजी का यह दौर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखा गया। स्पॉट गोल्ड 35.11 डॉलर या 1% बढ़कर 3,644 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, COMEX पर दिसंबर डिलिवरी वाला सोना 3,662 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। इसी तरह COMEX पर चांदी 0.67% बढ़कर 41.83 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची।
दिल्ली बाजार में मामूली गिरावट
हालांकि, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार को सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखी गई। स्टॉकिस्टों की बिकवाली के दबाव में सोना 200 रुपये टूटकर 1,07,670 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। 99.5% शुद्धता वाला सोना भी 200 रुपये घटकर 1,06,800 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। इसी तरह चांदी भी 1,000 रुपये गिरकर 1,26,000 रुपये प्रति किलो पर आ गई। शनिवार को सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड स्तर बनाए थे।
रिकॉर्ड तोड़ तेजी के पीछे कारण
रिलायंस सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी का कहना है कि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीदों ने सोने-चांदी की कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। अमेरिका में जारी हालिया रोजगार आंकड़े निराशाजनक रहे हैं, जिससे बाजार को विश्वास है कि ब्याज दरों में और कटौती होगी। ऐसे में निवेशकों ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की ओर रुख किया है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिकी डॉलर और कमजोर होता है और फेड की ओर से ब्याज दरों में कटौती जारी रहती है, तो आने वाले समय में सोना और चांदी दोनों और महंगे हो सकते हैं। हालांकि, घरेलू बाजार में मांग और स्टॉकिस्टों की बिकवाली जैसी परिस्थितियां कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकती हैं।
