नेपाल में हालात अचानक बेकाबू हो गए जब सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया। यह कदम युवाओं को नागवार गुज़रा और देखते ही देखते Gen-Z आंदोलन भड़क उठा। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे इस विरोध ने कुछ ही घंटों में हिंसक रूप ले लिया और देशभर में आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं शुरू हो गईं।
23 की मौत, कई घायल
आंदोलन इतना उग्र हुआ कि इसमें अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं। राजधानी काठमांडू समेत कई बड़े शहरों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने भीड़ जुटाई और सरकारी इमारतों को निशाना बनाया।
पीएम ओली को देना पड़ा इस्तीफा
प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे की थी। आखिरकार भारी दबाव के आगे झुकते हुए ओली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति पौडेल को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों का संवैधानिक और राजनीतिक समाधान निकालना ज़रूरी है और इसके लिए पद छोड़ना ही सही रास्ता है।
राष्ट्रपति ने भी छोड़ा पद
ओली के इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भी पद छोड़ दिया। इससे नेपाल में सत्ता का पूरा ढांचा हिल गया है। राजनीतिक हलकों में अब एक राष्ट्रीय सरकार बनाने की चर्चा तेज हो गई है।
नेताओं और मंत्रियों के घर बने निशाना
हिंसक भीड़ ने सिर्फ सरकारी इमारतों पर ही नहीं, बल्कि कई नेताओं और मंत्रियों के घरों पर भी हमला किया। बालकोट स्थित ओली का निजी आवास प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड, संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक के घरों पर भी धावा बोला गया।
छात्र और युवा आंदोलन के केंद्र में
Gen-Z आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हैं। कलंकी क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर सड़कें जाम कर दीं। वहीं ललितपुर जिले में संचार मंत्री गुरुंग के आवास पर पथराव हुआ। खास बात यह है कि गुरुंग ही वह मंत्री थे जिन्होंने सोशल मीडिया पर बैन लगाने का आदेश जारी किया था।
मंत्रियों की झड़ी लगी इस्तीफों की
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से पहले गृह मंत्री रमेश लेखक और स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। अब माना जा रहा है कि और भी मंत्री पद छोड़ सकते हैं। विपक्षी पार्टियों ने सुझाव दिया है कि नेपाली कांग्रेस को सरकार से अपने मंत्रियों को वापस बुलाना चाहिए और आंदोलनकारियों से बातचीत शुरू करनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें हैं – राष्ट्रीय सरकार का गठन, भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और सोशल मीडिया बैन को तुरंत हटाना। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन नेपाल की राजनीति के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है।
