काठमांडू: नेपाल में पिछले कई दिनों से चल रहे Gen-Z के आंदोलन के शांत होने के बाद अब राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों और नेताओं के बीच सहमति बन गई है कि देश को स्थिरता देने के लिए जल्द ही एक अंतरिम सरकार बनाई जाए। इसके लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की का नाम सबसे आगे आया है।
सुशीला कार्की पर सहमति
नेपाल की राजनीति में यह पहला मौका है जब बड़ी संख्या में युवा और आम नागरिक एक साथ किसी नाम पर सहमत हुए हैं। काठमांडू के मेयर बालेन शाह, जो इस आंदोलन की आवाज बनकर उभरे हैं, उन्होंने सोशल मीडिया पर साफ कहा है कि अब देश को एक ऐसी सरकार चाहिए जो चुनाव कराए और लोगों को नया जनादेश दे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों द्वारा सुझाए गए नाम का समर्थन करते हुए लिखा—
“प्रिय जेन-जी और सभी नेपाली, देश एक अभूतपूर्व दौर से गुजर रहा है। अब हमें धैर्य रखकर आगे बढ़ना होगा। मैं पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपने के प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ।”
सुशीला कार्की का रुख
पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने भी देशहित में काम करने की इच्छा जताई है। उनका कहना है,
“यह समय पूरे नेपाल को एकजुट होकर सोचने का है। हर नागरिक को अपने-अपने स्तर पर राष्ट्रहित में योगदान देना होगा। यदि मुझसे यह जिम्मेदारी मांगी जाएगी तो मैं देश के लिए काम करने को तैयार हूँ।”
उनके इस बयान ने आंदोलनकारियों और नागरिक समाज को और मजबूती दी है।
आंदोलन और हालात
नेपाल में यह विरोध प्रदर्शन अचानक तब तेज हो गया जब युवाओं ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरने का फैसला लिया। आंदोलन धीरे-धीरे हिंसक रूप लेने लगा और कई जगह आगजनी व तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आईं। हालात बिगड़ने के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद छोड़ना पड़ा।
मंगलवार रात से सेना को सड़कों पर तैनात कर दिया गया। सैनिकों ने गश्त शुरू की और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिया। काठमांडू समेत कई बड़े शहरों में लोगों को घरों में रहने के निर्देश दिए गए। इससे राजधानी में सन्नाटा छा गया।
सामान्य स्थिति की ओर कदम
अब धीरे-धीरे हालात सामान्य होते दिख रहे हैं। सेना और प्रशासन का दावा है कि हालात काबू में हैं और नागरिक भी शांति बनाए रखने में सहयोग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों और नागरिक संगठनों के बीच हुई वर्चुअल मीटिंग में यह तय किया गया कि सुशीला कार्की की अगुवाई में एक अंतरिम सरकार बनेगी, जो देश में नए चुनाव कराएगी।
नेपाल इस समय अपने राजनीतिक इतिहास के अहम मोड़ पर खड़ा है। युवाओं की आवाज से उपजी यह स्थिति अब एक नई दिशा लेती दिख रही है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ तो देश को जल्द ही एक ऐसी अंतरिम सरकार मिलेगी, जिसका उद्देश्य सिर्फ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना होगा। सबकी निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में नेपाल किस तरह स्थिरता की ओर कदम बढ़ाता है।
