देश को आज नया उपराष्ट्रपति मिलने जा रहा है। तमिलनाडु से आने वाले वरिष्ठ नेता सी.पी. राधाकृष्णन शुक्रवार, 12 सितंबर 2025 को उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सुबह 10 बजे राष्ट्रपति भवन में उन्हें यह पद की शपथ दिलाएँगी।
राधाकृष्णन ने हाल ही में हुए चुनाव में बी. सुदर्शन रेड्डी को हराकर जीत दर्ज की। यह चुनाव 9 सितंबर को हुआ था और इसमें सांसदों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कुल 781 सांसदों में से 767 ने मतदान किया, यानी करीब 98 प्रतिशत से अधिक वोटिंग हुई। उनकी यह जीत उस समय हुई जब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था।
छात्र राजनीति से राष्ट्रीय स्तर तक का सफर
सी.पी. राधाकृष्णन का राजनीतिक जीवन बेहद दिलचस्प रहा है। उन्होंने शुरुआत छात्र आंदोलनों से की और आगे चलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े। धीरे-धीरे वह भारतीय जनता पार्टी में एक अहम चेहरा बन गए। 2004 से 2007 तक वह तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष रहे।
साल 2007 में उन्होंने एक अनोखी रथ यात्रा निकाली। यह यात्रा 93 दिनों तक चली और उन्होंने लगभग 19,000 किलोमीटर की दूरी तय की। इस दौरान उन्होंने देशभर में नदियों को जोड़ने, आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता, समान नागरिक संहिता, अस्पृश्यता खत्म करने और नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने जैसे मुद्दों को उठाया।
संगठन और राज्यपाल पद का अनुभव
राधाकृष्णन लंबे समय तक संगठन की राजनीति में सक्रिय रहे। 2020 से 2022 तक वे केरल बीजेपी के प्रभारी भी रहे। उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी भरपूर है। उपराष्ट्रपति बनने से पहले वह महाराष्ट्र के राज्यपाल थे। इससे पहले उन्हें झारखंड का राज्यपाल बनाया गया था। इसके अलावा, उन्होंने तेलंगाना और पुडुचेरी का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाला।
संसद और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भूमिका
राधाकृष्णन को 1998 और 1999 में कोयंबटूर से सांसद चुना गया था। सांसद रहते हुए उन्होंने कई संसदीय समितियों में काम किया और अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी। 2004 में वे संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बने। वे ताइवान जाने वाले पहले भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे।
2016 में उन्हें कोच्चि कॉयर बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल में भारत का नारियल रेशा (coir) निर्यात रिकॉर्ड स्तर तक पहुँचा।
व्यक्तिगत जीवन और पृष्ठभूमि
सी.पी. राधाकृष्णन ओबीसी समुदाय कोंगु वेल्लार (गाउंडर) से ताल्लुक रखते हैं। उनकी पत्नी का नाम सुमति है और उनके एक बेटा तथा एक बेटी हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने 1974 में भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी में जगह बनाई थी। 1996 में उन्हें तमिलनाडु बीजेपी का सचिव बनाया गया।
सी.पी. राधाकृष्णन का सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर संसद, राज्यपाल पद और अब उपराष्ट्रपति तक पहुँचा है। उनकी सादगी और संगठनात्मक क्षमता ने उन्हें हमेशा अलग पहचान दिलाई। अब देखना होगा कि उपराष्ट्रपति के रूप में वे संसद और देश के लिए किस तरह नई दिशा तय करते हैं।
