अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन आईटी, फार्मा, वित्तीय सेवाओं और हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। वहीं, ऑटो, बैंकिंग और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों में निवेशकों की खरीदी देखी गई।
सेंसेक्स 119 अंकों की गिरावट के साथ बंद
बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 118.96 अंक यानी 0.15 फीसदी टूटकर 81,785.74 अंकों पर बंद हुआ। इसमें शामिल 10 कंपनियों के शेयर हरे निशान पर रहे जबकि 20 कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई।
निफ्टी भी लाल निशान पर
दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 44.80 अंक यानी 0.18 फीसदी की गिरावट के साथ 25,069.20 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स में इन्फोसिस, एचडीएफसी बैंक, सन फार्मा और टीसीएस के शेयर नीचे गए, जबकि भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फिनसर्व और टाटा मोटर्स में तेजी देखी गई।
पिछले हफ्ते सेंसेक्स में रही मजबूती
बीते हफ्ते बीएसई सेंसेक्स 1,193.94 अंक यानी 1.47 फीसदी चढ़कर बंद हुआ था। इस मजबूती का असर बाजार की दिग्गज कंपनियों के बाजार पूंजीकरण पर भी साफ दिखा।
टॉप-10 में से 8 कंपनियों का मार्केट कैप बढ़ा
सेंसेक्स की शीर्ष 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 8 के मार्केट कैप में सामूहिक रूप से 1,69,506.83 करोड़ रुपये का इजाफा दर्ज किया गया। इसमें सबसे बड़ा लाभ बजाज फाइनेंस को मिला, जिसने निवेशकों का भरोसा मजबूत बनाए रखा।
किन कंपनियों को हुआ फायदा
मार्केट कैप बढ़ाने वाली कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, इन्फोसिस और बजाज फाइनेंस शामिल रही। इन कंपनियों ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को मजबूत किया और बाजार की धारणा पर सकारात्मक असर डाला।
कौन सी कंपनियां रहीं नुकसान में
इसके विपरीत, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को झटका लगा। दोनों कंपनियों के बाजार मूल्यांकन में गिरावट देखने को मिली।
निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व पर
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी हुई हैं। ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक नीतियों से जुड़ी घोषणाएं भारतीय बाजार की दिशा तय कर सकती हैं।
