भारत के लिए पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और शैक्षिक संस्था यूनेस्को ने हिमालय की गोद में बसे कोल्ड डेजर्ट को बायोस्फियर रिजर्व घोषित कर दिया है। यह भारत का 13वां यूनेस्को बायोस्फियर रिजर्व बना है। सबसे खास बात यह है कि यह देश का पहला हाई-एल्टीट्यूड कोल्ड डेजर्ट रिजर्व है। इसकी घोषणा चीन के हांगझोउ में आयोजित पांचवें वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ बायोस्फियर रिजर्व्स में हुई, जहां दुनिया भर के 26 नए स्थलों को इस सूची में जोड़ा गया।
कोल्ड डेजर्ट: ठंडी और सूखी धरती
यह रिजर्व 3300 से 6600 मीटर की ऊंचाई पर फैला हुआ है और लगभग 7770 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल को कवर करता है। यहां की जलवायु बेहद कठोर है—बर्फीली हवाएं, ग्लेशियर घाटियां, पहाड़ी झीलें और ठंडे रेगिस्तान इसे अनोखा बनाते हैं। यह दुनिया के सबसे ठंडे और सूखे पारिस्थितिक तंत्रों में से एक है।
यह बायोस्फियर रिजर्व पिन वैली नेशनल पार्क और आसपास के क्षेत्रों को समेटे हुए है। इसमें चंद्रताल झील, सरचू और किब्बर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी भी शामिल हैं।
दुर्लभ वन्यजीवों का घर
कोल्ड डेजर्ट का पारिस्थितिक तंत्र बेहद खास है। यहां स्नो लेपर्ड (बर्फीला तेंदुआ), हिमालयी आईबेक्स, ब्लू शीप, हिमालयी भेड़िया, गोल्डन ईगल और हिमालयी स्नो कॉक जैसे दुर्लभ जीव पाए जाते हैं। ये सभी प्रजातियां ऊंचाई और ठंडी जलवायु के लिए ही अनुकूलित हैं।
पौधों की बात करें तो यहां 732 प्रकार की वैस्कुलर प्लांट्स मौजूद हैं। इनमें से 30 एंडेमिक यानी केवल यहीं पाई जाने वाली और 157 नियर-एंडेमिक प्रजातियां हैं। ये पौधे हिमालय की कठोर लेकिन अनोखी जलवायु में उगते हैं।
लोग और परंपराएं
इस रिजर्व में करीब 12,000 लोग रहते हैं, जो छोटे-छोटे गांवों में बसे हुए हैं। उनकी आजीविका याक और बकरी पालन, सीमित खेती और पारंपरिक तिब्बती चिकित्सा पर आधारित है। यहां के लोग प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर जीवन जीते हैं। बौद्ध मठों और स्थानीय पंचायतों की परंपराएं मिलकर इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करती हैं।
यूनेस्को की सराहना
यूनेस्को के साउथ एशिया रीजनल ऑफिस के डायरेक्टर टिम कर्टिस ने कहा कि कोल्ड डेजर्ट बायोस्फियर रिजर्व यह दिखाता है कि नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा और स्थानीय समुदायों के समर्थन को साथ-साथ कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
यह घोषणा यूनेस्को के मैन एंड द बायोस्फियर प्रोग्राम की 50वीं वर्षगांठ पर हुई। इस प्रोग्राम के तहत दुनिया भर में 785 स्थल अब तक शामिल किए जा चुके हैं।
भारत के अन्य यूनेस्को बायोस्फियर रिजर्व
कोल्ड डेजर्ट के जुड़ने के बाद भारत में कुल 13 यूनेस्को बायोस्फियर रिजर्व हो गए हैं। इनमें नीलगिरि, नंदा देवी, सुंदरबन, पचमारही, खंगचेंदजोंगा, ग्रेट निकोबार और अचंकोलम जैसे नाम शामिल हैं। इनमें से कोल्ड डेजर्ट सबसे ऊंचाई पर और सबसे ठंडा है।
पर्यावरण संरक्षण में नई मिसाल
यह रिजर्व न केवल जैव विविधता की रक्षा करेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन को भी बेहतर बनाएगा। पर्यटन, शोध और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन प्रकृति को प्राथमिकता दी जाएगी। भारत का यह कदम पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में एक नई मिसाल है।
