“रंगला पंजाब” केवल शहरों की सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असली अर्थ है धरती को स्वस्थ बनाना और किसान को समृद्ध बनाना। बरसों से पंजाब के किसान धान-गेहूँ के परंपरागत चक्र में फंसे हुए थे। अत्यधिक धान की खेती ने भूजल स्तर को खतरे में डाल दिया और किसानों की आय घटती रही। इसका समाधान था फसल विविधीकरण।
मक्का की ओर किसानों का बदलाव
मान सरकार ने इसे अवसर के रूप में देखा और किसानों को कम पानी वाली फसलों, खासकर मक्का की खेती के लिए प्रेरित किया। इसके तहत खरीफ मक्का की खेती के क्षेत्र में 16.27% की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। रकबा 86,000 हेक्टेयर (2024) से बढ़कर 1,00,000 हेक्टेयर (2025) हो गया। यह फसल विविधीकरण अभियान पंजाब की भावनात्मक और आर्थिक जीत को दर्शाता है।
पायलट प्रोजेक्ट से किसानों को प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में छह जिलों — बठिंडा, संगरूर, कपूरथला, जालंधर, गुरदासपुर और पठानकोट — में 12,000 हेक्टेयर भूमि को धान से मक्का में बदलने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया। किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹17,500 की पेशकश और मार्गदर्शन के लिए 185 किसान मित्र तैनात किए गए। इसके अलावा, मक्का अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ ₹7,000 की सब्सिडी भी दी जा रही है। इससे लगभग 30,000 किसानों को लाभ होगा।
जिलों में मक्का की स्थिति
कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ मक्का लगभग 7,000 हेक्टेयर या 19,500 एकड़ में बोया गया। पठानकोट में 4,100 एकड़, संगरूर 3,700, बठिंडा 3,200, जालंधर 3,100, कपूरथला 2,800 और गुरदासपुर 2,600 एकड़ में मक्का बोया गया। कुल मिलाकर, राज्य में मक्का की खेती लगभग 1.98 लाख एकड़ में बनी रही।
सुगम खरीद और मंडियों की तैयारी
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुडियाँ ने खरीफ मक्का की सुगम खरीद सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तरीय समितियों के गठन के आदेश दिए। उन्होंने किसानों से मंडियों में सूखा मक्का लाने और नमी 14% से अधिक न होने का ध्यान रखने का आग्रह किया। प्रशासनिक सचिव कृषि डॉ. बसंत गर्ग ने किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए।
मक्का क्रांति: किसानों की नई राह
14,000 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि पर मक्का की फसल ने दिखाया कि बदलाव संभव है। हर किसान जो धान छोड़कर मक्का उगा रहा है, वह धरती माँ के प्रति कर्ज चुका रहा है, भूजल बचा रहा है और अगली पीढ़ी के लिए समृद्ध विरासत छोड़ रहा है।
सरकार और किसान का संयुक्त प्रयास
मान सरकार की नीतियों और MSP की गारंटी ने किसानों को साहसिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। मक्का क्रांति पंजाब को धान की निर्भरता से मुक्त कर संतुलित और समृद्ध कृषि मॉडल की ओर ले जा रही है। यह दिखाता है कि जब सरकार और किसान एक साथ खड़े होते हैं, तो चुनौती कितनी भी बड़ी हो, सफलता निश्चित होती है। ‘रंगला पंजाब’ की नींव अब इस नई हरित लहर से मजबूत हो रही है।
