आज देशभर में सुहागिन महिलाएँ करवा चौथ का व्रत बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मना रही हैं। यह व्रत हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य सुख के लिए निर्जला उपवास रखती हैं।
पूजा का शुभ मुहूर्त
करवा चौथ 2025 में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक रहेगा। कुल अवधि 1 घंटा 14 मिनट की होगी।
चंद्रमा के दर्शन का समय रात 8:12 बजे निर्धारित है। महिलाएँ इसी समय चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित कर अपना व्रत पूरा करेंगी।
सुबह सूर्योदय के साथ ही महिलाएँ व्रत की शुरुआत करती हैं और पूरे दिन बिना भोजन और जल ग्रहण किए उपवास रखती हैं। रात में चाँद निकलने के बाद वे पूजा करती हैं और पति के हाथों से पानी पीकर व्रत का पारण करती हैं।
करवा चौथ का धार्मिक और सामाजिक महत्व
करवा चौथ सिर्फ व्रत नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम और समर्पण का त्योहार है। यह व्रत पति-पत्नी के बीच के रिश्ते को और मजबूत बनाता है।
माना जाता है कि जो महिलाएँ श्रद्धा और विधि से यह व्रत करती हैं, उनके जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और खुशहाली का वास होता है।
इस दिन महिलाएँ सोलह श्रृंगार करती हैं, मेहंदी लगाती हैं, नए वस्त्र धारण करती हैं और शाम के समय करवा चौथ की कथा सुनती हैं। पूजा के दौरान मिट्टी या पीतल के करवे में जल भरकर चंद्रमा और भगवान शिव-पार्वती की आराधना की जाती है।
परिवार और परंपरा का प्रतीक
करवा चौथ सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि परिवार की एकता और प्रेम का प्रतीक है। यह दिन स्त्री की शक्ति, उसके समर्पण और उसकी आस्था का उत्सव है।
घर-घर में शाम के समय जब महिलाएँ थाल सजाकर चाँद को निहारती हैं, तो वातावरण में श्रद्धा, सौंदर्य और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
करवा चौथ 2025 का यह पावन अवसर हर सुहागिन के जीवन में नई ऊर्जा और विश्वास लेकर आता है। चाँद की रौशनी में किया गया यह व्रत न सिर्फ पति की लंबी उम्र का प्रतीक है, बल्कि परिवार में प्रेम, शांति और सौहार्द का संदेश भी देता है।
शुभ करवा चौथ!
