हरियाणा में आईपीएस अधिकारी वाई पूरन की आत्महत्या मामले ने बड़ा मोड़ ले लिया है। इस मामले में अब हरियाणा पुलिस के महानिदेशक (DGP) शत्रुजीत कपूर समेत 13 वरिष्ठ अधिकारियों और पूर्व अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह शिकायत पूरन की पत्नी और आईएएस अधिकारी अमनीत कौर पूरन ने दी थी।
एफआईआर चंडीगढ़ के सेक्टर-11 पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है। इसमें कई बड़े नाम शामिल हैं — जिनमें मौजूदा डीजीपी से लेकर पूर्व डीजीपी और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तक हैं। मामला अब राज्य प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचल का कारण बन गया है।
कौन-कौन शामिल हैं FIR में
एफआईआर में जिन 13 अधिकारियों और पूर्व अधिकारियों के नाम दर्ज हैं, उनमें शामिल हैं —
- शत्रुजीत कपूर (DGP, हरियाणा)
- नरेंद्र बिजारणिया (SP, रोहतक)
- मनोज यादव (पूर्व DGP)
- राजीव अरोड़ा (पूर्व ACS, गृह विभाग)
- टीवीएसएन प्रसाद (पूर्व चीफ सेक्रेटरी)
- पीके अग्रवाल (पूर्व DGP)
- डॉ. एम. रवि किरण (IAS अधिकारी)
- आईजी पंकज नैन
- एडीजीपी अमिताभ ढिल्लों
- एडीजीपी संजय कुमार
- आईएएस कला रामचंद्रन
- आईपीएस संदीप खिरवार
- आईपीएस सिबाश कविराज
एफआईआर में लिखा गया है कि ये नाम “सुसाइड नोट के मुताबिक” दर्ज किए गए हैं, जिसमें पूरन ने कई अधिकारियों को अपनी आत्महत्या के लिए जिम्मेदार बताया था।
अमनीत कौर के गंभीर आरोप
आईएएस अधिकारी अमनीत कौर का आरोप है कि उनके पति वाई पूरन को कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
उन्होंने दावा किया कि DGP शत्रुजीत कपूर और SP नरेंद्र बिजारणिया ने उनके पति को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और रिश्वत के झूठे केस में फंसाने की साजिश रची।
अमनीत का कहना है कि इन सबके चलते पूरन मानसिक दबाव में आ गए और अंततः आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
उन्होंने मांग की है कि DGP और SP की तत्काल गिरफ्तारी की जाए, क्योंकि उनके पास सबूत मिटाने की संभावना है।
DGP को छुट्टी पर भेजे जाने की संभावना
FIR दर्ज होने के बाद यह चर्चा तेज है कि हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर को छुट्टी पर भेजा जा सकता है। वहीं, रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारणिया को भी उनके पद से हटाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
मामले की जांच अब तेज
पूरन की आत्महत्या के बाद से ही यह मामला संवेदनशील बना हुआ था। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच तेज हो गई है।
पुलिस के मुताबिक, जांच अमनीत की लिखित शिकायत और वाई पूरन के फाइनल नोट पर आधारित है।
अब देखना होगा कि इतने बड़े अधिकारियों पर दर्ज यह मामला आगे क्या मोड़ लेता है — क्योंकि हरियाणा के प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के लिए यह एक बड़ा परीक्षण बन गया है।
