जापान ने अपने इतिहास में पहली बार किसी महिला को प्रधानमंत्री चुना है। मंगलवार (21 अक्टूबर 2025) को साने ताकाइची ने बहुमत हासिल कर देश की नई प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया। उनके नेतृत्व में जापान की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। ताकाइची अब शिगेरु इशिबा की जगह लेंगी।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साने ताकाइची को प्रधानमंत्री चुने जाने पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर लिखा – “साने ताकाइची, जापान की प्रधानमंत्री चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई। मैं भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए आपके साथ काम करने को उत्सुक हूं। हमारे देशों के बीच गहरे होते संबंध एशिया और विश्व में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।”
मोदी के अलावा कई विश्व नेताओं ने भी ताकाइची को शुभकामनाएं दीं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने भी ‘एक्स’ पर लिखा – “मैं जापान की प्रधानमंत्री बनने पर साने ताकाइची को बधाई देता हूं। मुझे विश्वास है कि वह अपने देश को और अधिक प्रगति और विकास की ओर ले जाएंगी। हम दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए मिलकर काम करेंगे।”
संसद में बहुमत से जीत
जापान की संसद, जिसे ‘डाइट (Diet)’ कहा जाता है, में साने ताकाइची ने साधारण बहुमत से जीत हासिल की। उनकी पार्टी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने जापान इनोवेशन पार्टी के साथ गठबंधन किया। क्योदो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ताकाइची ने निचले सदन में पहले ही दौर में जीत दर्ज की और दूसरे दौर के मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। उन्हें 237 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी योशीहिको नोडा को 149 वोट ही मिल सके।
“मैं सिर्फ काम करूंगी” – ताकाइची
प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने पहले भाषण में साने ताकाइची ने देशवासियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अगर जापान के लोग एकजुट होकर मेहनत करें तो देश फिर से मजबूती से खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा – “मैं खुद ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ का ध्यान नहीं रखूंगी। मैं सिर्फ काम, काम और काम करूंगी।”
साने ताकाइची जापान की राजनीति में एक सशक्त और दृढ़ नेता के रूप में जानी जाती हैं। वह लंबे समय से एलडीपी की प्रमुख चेहरा रही हैं और अब प्रधानमंत्री पद संभालकर उन्होंने जापान में महिला नेतृत्व की नई मिसाल कायम की है।
उनकी जीत न सिर्फ जापान की राजनीति के लिए ऐतिहासिक पल है, बल्कि यह विश्व स्तर पर भी महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
