पंजाब इस साल एक नए बदलाव की कहानी लिख रहा है। जिस पराली को अब तक प्रदूषण का कारण माना जाता था, वही अब समाधान की मिसाल बन गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने पिछले तीन वर्षों में जो काम किया है, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
2021 में जहाँ पंजाब में पराली जलाने के 4,327 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर केवल 415 रह गई। यानी करीब 90 प्रतिशत की ऐतिहासिक कमी। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि सरकार की रणनीति, किसानों के सहयोग और लगातार की गई मेहनत का नतीजा है।
खेतों में उतरा अभियान, फाइलों में नहीं
आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कहा था – “पंजाब की हवा अब धुएं में नहीं घुटेगी।” इस वादे को पूरा करने के लिए सरकार ने कागज़ी योजनाओं से आगे बढ़कर ज़मीनी स्तर पर काम किया।
हर जिले में पराली प्रबंधन अभियान शुरू हुआ। हज़ारों CRM मशीनें (Crop Residue Management Machines) किसानों को दी गईं ताकि वे पराली को जलाने की बजाय मिट्टी में मिला सकें। ब्लॉक और गांव स्तर पर विशेष टीमें बनाई गईं जो लगातार निगरानी करती रहीं कि कोई खेत में आग न लगाए।
किसानों को बनाया गया साथी, दुश्मन नहीं
इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत रही – किसानों की भागीदारी। सरकार ने किसानों को सजा या जुर्माने से डराने की बजाय उन्हें समझाया कि पराली प्रबंधन से न सिर्फ पर्यावरण बचेगा, बल्कि उनकी ज़मीन भी उपजाऊ रहेगी। किसानों को मशीनों पर सब्सिडी दी गई, कई जगह पंचायतों ने मिलकर सामूहिक मशीन केंद्र बनाए।
अब पंजाब के कई गांवों में किसान मिलकर पराली से खाद और बायो-एनर्जी बना रहे हैं। यह नया मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन गया है।
प्रदूषण पर बड़ा असर – हवा हुई साफ
संगरूर, बठिंडा, लुधियाना, पटियाला और अमृतसर जैसे जिले, जो कभी पराली के सबसे बड़े केंद्र माने जाते थे, अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
2025 के अक्टूबर महीने में इन इलाकों का AQI (Air Quality Index) पिछले सालों के मुकाबले 25 से 40 प्रतिशत तक सुधर गया है। दिल्ली-एनसीआर तक इसका सकारात्मक असर देखने को मिला है।
पहले जहाँ पंजाब के खेतों से उठने वाला धुआं राजधानी की हवा को जहरीला बना देता था, अब वही पंजाब स्वच्छ हवा का प्रतीक बन गया है।
बदलाव की नई सोच
अब पंजाब में पराली का मतलब “आग और धुआं” नहीं, बल्कि “नवाचार और समाधान” बन गया है। गांवों में किसान खुद अभियान चला रहे हैं, बच्चे स्कूलों में पर्यावरण क्लब बना रहे हैं और समाज में एक नई सोच पैदा हो रही है — खेती और प्रकृति साथ-साथ चल सकते हैं।
प्रेरणा बना पंजाब
मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो और नीति मजबूत, तो सालों पुरानी समस्या भी खत्म की जा सकती है।
आज पंजाब की यह कहानी देशभर के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है। अब यह राज्य सिर्फ “पराली जलाने वाला” नहीं, बल्कि “पर्यावरण बचाने वाला पंजाब” कहलाया जा रहा है।
पंजाब ने दिखा दिया है — जब किसान और सरकार एकजुट होकर काम करें, तो खेत भी हरियाले रहते हैं और हवा भी मुस्कुराती है।
