पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने गृह मंत्री अमित शाह के साथ नॉर्थ ज़ोनल काउंसिल की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने पंजाब से जुड़े कई अहम मुद्दों का खुलकर जिक्र किया और बाकी राज्यों द्वारा पंजाब से की जा रही मांगों पर नाराज़गी भी जताई।
मुख्यमंत्री मान ने बताया कि बैठक में सभी राज्यों ने आपसी विवादों और अपने-अपने मामलों पर बात रखी, वहीं उन्होंने पंजाब की समस्याओं को मजबूती से केंद्र के सामने रखा। बातचीत के दौरान पंजाब के पानी का मुद्दा विशेष रूप से उठा, जिस पर मान ने साफ कहा कि हर कोई पंजाब से कुछ न कुछ मांगता रहता है, पर कोई यह नहीं सोचता कि पंजाब को भी कुछ वापस मिलना चाहिए।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “जो भी आता है, कहता है पंजाब हमें यह दे दे, वो दे दे। कोई हेडवर्क्स मांग रहा है, कोई SYL मांग रहा है, कोई चंडीगढ़ पर दावा कर रहा है, तो कोई पंजाब की बिजली में हिस्सा चाहता है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि चंडीगढ़ कहता है विश्वविद्यालय हमें दे दो, केंद्र कहता है BBMB दे दो। लेकिन जब पंजाब अपने हक की बात करता है—जैसे कि 1600 करोड़ रुपए की—तो कोई सुनवाई नहीं होती।
मान ने तीखे अंदाज़ में कहा, “सब पंजाब को बड़ा भाई बताते हैं, लेकिन बड़ा भाई होने का मतलब यह नहीं कि उसे खाली कर दो। कहीं ऐसा न हो कि छोटे भाई बस जाएं और बड़ा भाई उजड़ जाए।”
उन्होंने यह भी कहा कि बैठकों में कभी-कभी पुराने सालों की बहसें शुरू कर दी जाती हैं, जिससे असली मुद्दों पर चर्चा प्रभावित होती है। मान ने स्पष्ट किया कि पंजाब की ज़मीन, संसाधन और अधिकार किसी भी हालत में कमज़ोर नहीं पड़ने दिए जाएंगे और राज्य अपनी हिस्सेदारी का हक लेकर रहेगा।
मुख्यमंत्री मान की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस पंजाब के हितों की रक्षा और संसाधनों के न्यायपूर्ण बंटवारे को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
