जम्मू-कश्मीर में पकड़े गए डॉक्टरों से हुई पूछताछ ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक ऐसा नेटवर्क खोल दिया है, जिसकी कल्पना भी कम ही लोग कर सकते थे। जांच में सामने आया है कि यह पूरा गैंग जैश-ए-मोहम्मद के फिदायीन मॉड्यूल से जुड़ा था और बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। फॉरेंसिक टीमों ने आरोपियों के मोबाइल फोन खंगाले तो उनमें कई चौंकाने वाले डिजिटल सबूत मिले।
सबसे अहम खुलासा एक सिग्नल ऐप ग्रुप का हुआ। बताया जाता है कि इस ग्रुप का एडमिन मॉड्यूल का मास्टरमाइंड और फिलहाल फरार डॉक्टर मुजफ़्फर था। इसी ग्रुप में डॉक्टर उमर, मुजम्मिल, आदिल और शाहीन भी जुड़े थे। यहीं पर मॉड्यूल की हर छोटी-बड़ी गतिविधि की जानकारी साझा की जाती थी।
डॉक्टर उमर—मॉड्यूल का सबसे सक्रिय सदस्य
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में डॉक्टर उमर की भूमिका सबसे ज्यादा अहम थी। हर बार जब अमोनियम नाइट्रेट, ट्रायएसिटोन ट्राइपरॉक्साइड (TATP) या अन्य केमिकल खरीदे जाते थे, वह विस्तृत विवरण इसी ग्रुप में भेजता था—कितनी मात्रा खरीदी, किससे ली और आगे उसका उपयोग कैसे होना है।
डिजिटल रिकॉर्ड साफ तौर पर दिखाते हैं कि विस्फोटक सामग्री, टाइमर और वायर जैसे उपकरणों की अधिकांश खरीदारी उमर ने ही की थी। इतना ही नहीं, मॉड्यूल के लिए खरीदी गई i20 कार की सूचना भी उसने ही ग्रुप में साझा की थी।
मुजम्मिल के पास था ‘सेफ स्टोरेज’ का जिम्मा
खरीदी गई विस्फोटक सामग्री को सुरक्षित रखने का काम डॉक्टर मुजम्मिल को दिया गया था। जैसे ही नया स्टॉक लाया जाता, वह उसे अपने किराए के कमरे में रखता और फिर उसकी तस्वीरें खींचकर ग्रुप में भेज देता, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सामान सही जगह पहुंच चुका है।
फैसल इशाक भट्ट—परदे के पीछे का हैंडलर
पूछताछ में एजेंसियों के हाथ एक और बड़ा नाम लगा—फैसल इशाक भट्ट। आरोपियों का कहना है कि यह व्यक्ति मॉड्यूल का वह हैंडलर था, जिसे रोजाना की गतिविधियों की रिपोर्ट भेजी जाती थी। उमर ही हर अपडेट सीधे इसी तक पहुंचाता था—विस्फोटक जुटाने से लेकर टेस्टिंग तक।
हालांकि, अभी तक इसकी असली पहचान सामने नहीं आई है। जांच एजेंसियों का अनुमान है कि यह नाम भी झूठा हो सकता है और इसे कश्मीरियत का आभास देने के लिए इस्तेमाल किया गया होगा।
चार पाकिस्तानी हैंडलर आए रडार पर
एजेंसियों के अनुसार, मुजफ़्फर के अफगानिस्तान भागने के बाद से पूरे मॉड्यूल की कमान यही रहस्यमयी हैंडलर संभाल रहा था और वह सऊदी अरब के +966 कोड वाले वर्चुअल नंबर से निर्देश दे रहा था।
अब तक की जांच में जैश-ए-मोहम्मद के चार पाकिस्तानी हैंडलर सामने आए हैं—
अबू उक़ाशा, हंजुल्लाह, निसार और फैसल इशाक भट्ट।
जांच टीमें अब इनकी असली पहचान और इनके नेटवर्क को पूरी तरह सामने लाने में लगी हुई हैं।
