हफ्ते के पहले ही दिन सोना निवेशकों को झटका देता दिखाई दिया। सोमवार सुबह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के फ्यूचर प्राइस भारी गिरावट के साथ खुले। खबर लिखे जाने तक सोना 1,515 रुपये यानी करीब 1.17% टूटकर 1,22,743 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। यह गिरावट पिछले कई दिनों की मजबूती के बाद आई है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
चांदी की कीमतें भी लुढ़कीं
सोने के साथ-साथ चांदी के वायदा भाव में भी गिरावट देखने को मिली। MCX पर चांदी तकरीबन 0.75% टूटकर 1,53,000 रुपये के पास कारोबार कर रही थी। चांदी में यह कमजोरी पिछले कुछ समय से चल रहे उतार–चढ़ाव का ही हिस्सा मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट का रुख
गिरावट का असर केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहा। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी सोना और चांदी कमजोर शुरूआत के साथ ट्रेड कर रहे हैं। न्यूयॉर्क के कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर सोना $4,069.20 प्रति औंस पर खुला, जबकि पिछला बंद भाव $4,079.50 था। खबर लिखते समय सोना करीब $35.10 गिरकर $4,044.40 प्रति औंस पर पहुंच गया था। कुछ दिनों पहले ही सोना $4,398 के एक साल के उच्च स्तर को छू चुका है।
चांदी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर
COMEX पर चांदी का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट $49.85 प्रति औंस पर खुला था, जो पिछली क्लोजिंग $49.91 से कम रहा। ट्रेडिंग के दौरान चांदी में और गिरावट आई और यह 40 सेंट टूटकर $49.51 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। कुछ समय पहले चांदी $53.76 के उच्च स्तर तक पहुंच गई थी, लेकिन अब इसमें लगातार गिरावट देखी जा रही है।
गिरावट के पीछे क्या वजहें?
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर में मजबूती, वैश्विक आर्थिक संकेतों में अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता की वजह से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय बांड यील्ड में बढ़ोतरी और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों में सुधार भी सोने–चांदी की कीमतों को नीचे खींच रहे हैं।
भारत में त्योहारों के बाद मांग सामान्य होने लगी है, जिससे स्थानीय बाजार में भी सोने–चांदी पर दबाव बना हुआ है।
आगे क्या उम्मीद?
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में फेडरल रिज़र्व की पॉलिसी, डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की कीमतें सोने–चांदी के रुझान को प्रभावित कर सकती हैं। अभी के लिए तेजी की उम्मीद कम है, लेकिन लंबी अवधि में निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानते हैं।
सोना–चांदी खरीदने या बेचने की योजना बनाने वालों के लिए जरूरी है कि वे मौजूदा उतार–चढ़ाव को देखते हुए विशेषज्ञों की राय के अनुसार ही कदम उठाएं।
