संविधान दिवस के अवसर पर संसद के पुराने सेंट्रल हॉल में एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें देश की संवैधानिक यात्रा को याद किया गया। इस कार्यक्रम की सबसे मुख्य झलक रही—राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा संविधान की प्रस्तावना का वाचन।
राष्ट्रपति ने पढ़ी संविधान प्रस्तावना
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के संविधान की प्रस्तावना पढ़कर की। प्रस्तावना वाचन के बाद पूरा हॉल राष्ट्रगान के सुरों से गूंज उठा। इस दौरान देश के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे, जिनमें उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और कई केंद्रीय मंत्री शामिल थे।
संविधान अब 9 नई भाषाओं में डिजिटल रूप से उपलब्ध
कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा था—संविधान के नौ भाषाओं में अनुवाद का डिजिटल लोकार्पण। राष्ट्रपति मुर्मू ने इन अनुवादित संस्करणों को औपचारिक रूप से जारी किया। इन भाषाओं में शामिल हैं:
मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया, असमिया और मलयालम।
इन डिजिटल संस्करणों के जारी होने से संविधान तक पहुंच और भी आसान हो गई है। अब अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले लोग संविधान को अपनी मातृभाषा में पढ़ पाएंगे।
संविधान निर्माताओं को भावपूर्ण नमन
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में संविधान निर्माताओं के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संविधान दिवस पूरे देश की ओर से उन महान व्यक्तियों को याद करने का अवसर है, जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र की नींव रखी।
नेताओं की उपस्थिति से सजा सेंट्रल हॉल
संसद का सेंट्रल हॉल इस मौके पर बेहद गरिमामय दिखाई दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति ने इस समारोह को और खास बना दिया। सभी ने मिलकर संविधान के महत्व और उसकी आत्मा को याद किया।
संविधान दिवस का यह आयोजन न सिर्फ इतिहास की याद दिलाता है, बल्कि आगे बढ़ते भारत में संविधान की भूमिका को भी मजबूत करता है। नौ भाषाओं में डिजिटल संस्करण का जारी होना विविधता में एकता के हमारे संदेश को और मजबूत करता है।
