पंजाब सरकार ने इस साल अशीर्वाद स्कीम के तहत बड़ी राहत देते हुए अनुसूचित जाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की बेटियों के विवाह के लिए 22.66 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह जानकारी सामाजिक न्याय, अधिकारिता और अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने दी।
मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य के 15 जिलों से कुल 4443 योग्य आवेदन अशीरवाद पोर्टल पर प्राप्त हुए थे। इन सभी को कवर करने के लिए यह राशि जारी की गई है। उन्होंने बताया कि यह स्कीम गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बेटियों की शादी में आर्थिक सहयोग देने के लिए चलाई जा रही है, ताकि ऐसी परवरिश वाले परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हो सके।
किस जिले को कितना लाभ मिला?
जारी राशि से जिन जिलों के लाभार्थियों को सहायता दी गई है, वे इस प्रकार हैं—
- अमृतसर: 1297
- बरनाला: 18
- बठिंडा: 138
- फिरोजपुर: 748
- गुरदासपुर: 394
- होशियारपुर: 105
- जालंधर: 470
- मानसा: 309
- श्री मुक्तसर साहिब: 239
- पटियाला: 52
- पठानकोट: 347
- रूपनगर: 38
- एस.ए.एस. नगर (मोहाली): 17
- संगरूर: 122
- मलौट/मलेरकोटला: 149
यह सारी राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी गई है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और सहायता तुरंत मिले।
अशीर्वाद स्कीम क्या है?
डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि पंजाब सरकार इस योजना के तहत गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए 51,000 रुपये देती है। योजना के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं—
- परिवार पंजाब का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- परिवार की आय गरीबी रेखा से नीचे हो।
- परिवार अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग या अन्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में आता हो।
- एक परिवार की अधिकतम दो बेटियों को ही इस योजना का लाभ मिल सकता है।
सरकार का उद्देश्य है कि गरीब परिवारों की बेटियों की शादी सम्मान के साथ हो सके और उन्हें किसी तरह की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
सरकार की प्रतिबद्धता
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार समाज के हर वर्ग की भलाई के लिए लगातार काम कर रही है। खासकर उन वर्गों के लिए जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या पिछड़े वर्गों में आते हैं। सरकार की कोशिश है कि उन्हें मुख्यधारा में लाया जाए और उनके जीवन स्तर में सुधार हो।
अंत में मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में भी ऐसी योजनाओं को और मजबूत बनाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद परिवार लाभ उठा सकें।
