पंजाब में किलोमीटर स्कीम वाली बसों का टेंडर रद्द किए जाने के विरोध में चल रही हड़ताल पर अब सरकार ने कठोर कदम उठा लिया है। हड़ताल में शामिल सभी कच्चे मुलाज़िमों को सस्पेंड कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि लोगों को परेशान करने वाली किसी भी हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताई पुरानी सरकारों की गलती
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपना पहला बयान जारी करते हुए कहा कि आज जो हालात बन रहे हैं, वह पिछली सरकारों की गलत नीतियों का नतीजा हैं। उन्होंने कहा कि कच्चे कर्मियों को तो भर्ती कर लिया गया, लेकिन यह तय ही नहीं किया गया कि उन्हें कितना वेतन मिलेगा या उनकी नौकरी की अवधि क्या होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह किसी के घर का चूल्हा बंद नहीं करना चाहते, इसलिए समाधान बातचीत से ही निकलेगा।
बातचीत का रास्ता खुला, पर आम जनता को परेशानी नहीं
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि हड़ताल लोकतांत्रिक हक है, लेकिन इससे जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा कर्मचारियों की समस्याएँ सुनने के लिए तैयार है, लेकिन सड़कें रोककर और बस सेवा ठप करके लोगों को मुश्किल में डालना सही तरीका नहीं है। उन्होंने कच्चे कर्मियों को अपील की कि वे टेबल पर बैठकर बातचीत करें ताकि उनके मुद्दों का हल जल्दी निकल सके।
कर्मचारियों के हक देने का आश्वासन
मान सरकार ने भरोसा दिलाया है कि कर्मचारियों की जायज़ मांगों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही सभी मुद्दों पर चर्चा कर समाधान निकालेगी और कर्मचारियों को उनका उचित हक दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बस सेवाएं ठप होने से लाखों यात्रियों को दिक्कत होती है, इसलिए बातचीत ही सबसे बेहतर रास्ता है।
स्थिति सामान्य करने की तैयारी
सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन को जल्द सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, सस्पेंड किए गए कर्मचारियों से भी उम्मीद जताई गई है कि वे हड़ताल खत्म करके बातचीत का हिस्सा बनेंगे।
