साल 2025 की भीषण बाढ़ ने पंजाब को गहरा नुकसान पहुँचाया था। प्रदेश के कई जिले पानी में डूब गए, हजारों परिवार बेघर हो गए और लाखों एकड़ फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। इस आपदा के बाद केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने राहत और पुनर्वास की बात कही थी। लेकिन अब राहत राशि को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
PM के दौरे के बाद बढ़ी थी उम्मीदें
बाढ़ के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब का दौरा किया था। उन्होंने हवाई सर्वे किया और स्थिति का जायज़ा लिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने उस समय पंजाब को 1600 करोड़ रुपये की विशेष राहत सहायता देने का ऐलान किया था।
इस घोषणा के बाद उम्मीद जगी थी कि मदद जल्द मिलेगी और पुनर्निर्माण के काम तेज होंगे।
कई महीनों बाद भी राशि न मिलने का दावा
अब, बाढ़ के कई महीने बीतने के बाद, पंजाब सरकार का कहना है कि उन्हें अभी तक केंद्र की ओर से घोषित सहायता की कोई राशि प्राप्त नहीं हुई।
राज्य सरकार के अधिकारियों का दावा है कि न तो कोई किस्त जारी हुई और न ही वित्तीय सहायता को लेकर केंद्र से कोई आधिकारिक पत्र मिला।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को कई पत्र लिखकर राहत राशि की मांग दोहराई है। राज्य सरकार के अनुसार, हर बार उन्हें सिर्फ यही जवाब मिला — “फाइल प्रक्रिया में है”, “मामला विचाराधीन है”।
केंद्र की ओर से अलग-अलग बयान
दूसरी ओर, कई केंद्रीय मंत्रियों ने मीडिया में बयान देते हुए कहा है कि पंजाब को विभिन्न मदों के तहत कुछ राशि जारी की गई है, लेकिन राज्य सरकार का दावा है कि उनके खाते में एक भी रुपया नहीं पहुँचा।
इस पर आधिकारिक स्तर पर दोनों पक्षों के आंकड़ों में स्पष्टता अभी तक सामने नहीं आई है।
बाढ़ के नुकसान का बोझ अभी भी बरकरार
2025 की बाढ़ में:
- सैकड़ों गांव प्रभावित हुए
- कई जानें गईं
- किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा
- घर, सड़कें और पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए
राज्य सरकार का कहना है कि पुनर्वास और निर्माण कार्यों के लिए तात्कालिक सहायता बेहद जरूरी है, ताकि ग्रामीण और कृषि क्षेत्र दोबारा खड़ा हो सके।
विपक्ष और सियासी बहस तेज
राहत राशि के मुद्दे पर अब राजनीति भी गर्म हो गई है।
राज्य सरकार केंद्र पर उपेक्षा और भेदभाव का आरोप लगा रही है, जबकि केंद्र की ओर से दावा किया जा रहा है कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार चल रही हैं और राज्य से कुछ दस्तावेज मांगे गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा पंजाब की सियासत में बड़ा विषय बन सकता है। 2027 के चुनावों से पहले दोनों पक्ष इस मुद्दे को अपने तरीके से जनता के बीच रखने की कोशिश करेंगे।
फिलहाल राहत राशि को लेकर स्थिति अस्पष्ट है।
राज्य सरकार लगातार दावा कर रही है कि उन्हें त्वरित वित्तीय सहायता की जरूरत है, जबकि केंद्र की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
