पंजाब के किसानों के लिए इस साल कपास की खेती एक चुनौती बन गई थी। बाजार में नरमा और देसी कपास की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे जा रही थीं, जिससे किसानों को भारी नुकसान का डर सताने लगा था। इसी मुश्किल समय में मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने आगे आकर यह साबित कर दिया कि वह किसानों के हितों को सबसे ऊपर रखती है।
मान सरकार का तुरंत हस्तक्षेप — CCI को खरीद बढ़ाने के निर्देश
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्थिति को गंभीरता से लेकर तुरंत केंद्र सरकार की एजेंसी कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) से बड़े पैमाने पर खरीद शुरू करने की मांग की। सरकार के इस सीधे हस्तक्षेप का बड़ा असर हुआ और CCI ने मंडियों में सक्रिय खरीद शुरू कर दी।
बढ़ी मांग, सुधरे दाम — किसानों के चेहरे पर मुस्कान
CCI की एंट्री के बाद कपास के दाम तेजी से बढ़े।
- नरमा कपास का औसत भाव अब ₹7,500 प्रति क्विंटल से ऊपर चला गया है, जो MSP ₹7,710 के बेहद करीब है।
- देसी कपास के भाव में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।
यह किसानों के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि पहले वे मजबूरी में कम दाम पर अपनी फसल बेच रहे थे। अब वे अपनी मेहनत का सही मूल्य पा रहे हैं।
बारिश और बाढ़ के बावजूद कपास की अधिक आवक
पंजाब के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ का असर जरूर पड़ा, लेकिन इसके बावजूद इस साल कपास की आवक पिछले साल की तुलना में 1 लाख क्विंटल ज्यादा रही। यह साफ दिखाता है कि किसान मान सरकार की नीतियों पर भरोसा रख रहे हैं और कपास की खेती से जुड़े हुए हैं।
पिछले साल सिर्फ 170 क्विंटल, इस साल 35,000 क्विंटल से ज़्यादा खरीद!
मंडी बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल इसी समय CCI ने सिर्फ 170 क्विंटल कपास खरीदी थी। लेकिन मान सरकार के दबाव और सक्रियता के बाद इस बार CCI ने अब तक 35,348 क्विंटल से अधिक खरीद कर ली है।
यह बड़ा बदलाव किसानों को बाजार में सही दाम दिलाने में निर्णायक साबित हुआ।
MSP से नीचे बिक्री रुकी — किसानों की कमाई सुरक्षित
1 दिसंबर तक पंजाब में 2,30,423 क्विंटल कपास की खरीद हुई थी। शुरुआत में 60% से ज्यादा कपास MSP से नीचे बिक रही थी, लेकिन CCI के उतरते ही पूरे परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया। कीमतें सुधरीं और किसान अपने उत्पाद को उचित दाम पर बेचने लगे।
किसानों की आर्थिक सुरक्षा — मान सरकार की प्राथमिकता
मान सरकार का स्पष्ट मानना है कि किसान मज़बूत होंगे तो पंजाब मज़बूत होगा। इसलिए कपास खरीद मामले में सरकार ने जिस तेजी और प्रभावशीलता से काम किया, उसने हजारों किसानों को नुकसान से बचा लिया।
यह कदम दिखाता है कि पंजाब सरकार संकट के समय भी किसानों के साथ खड़ी है और उनकी कमाई व सम्मान की रक्षा करना उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
