पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) ने साफ कर दिया है कि अगली सैनेट चुनाव प्रक्रिया 2026–2030 कार्यकाल के लिए होगी। यानी नई सैनेट का कार्यकाल चार साल का रहेगा और इसमें किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। पीयू मैनेजमेंट ने बताया कि 2021 में चुनाव देर से होने के कारण पिछला कार्यकाल तीन साल का रहा था, जिससे इस बार भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। अब यह स्पष्ट है कि नई सैनेट 2027 में कार्यभार संभालेगी और 2030 तक काम करेगी।
अफवाहों पर लगा विराम, सैनेट में खुशी का माहौल
कुछ पूर्व सैनेटरों में यह चर्चा चल रही थी कि चुनाव संभवतः 2024 में करवाए जा सकते हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अब इन सभी अटकलों को खारिज कर दिया है। 2026 में चुनाव होने की आधिकारिक घोषणा से सैनेटरों और इच्छुक उम्मीदवारों में खुशी और उत्साह का माहौल है।
सिंडिकेट चुनाव दिसंबर 2026 में
सैनेट के गठन के बाद दिसंबर 2026 में सिंडिकेट चुनाव भी आयोजित होंगे। सिंडिकेट में कुल 15 सदस्य होते हैं और इन्हें 91 सदस्यीय सैनेट के भीतर से चुना जाता है। सिंडिकेट के साथ ही डीन का चुनाव भी होगा। बताया गया कि मौजूदा सैनेट का कार्यकाल दो साल पहले खत्म हो चुका है और सिंडिकेट चुनाव हुए लगभग तीन साल बीत चुके हैं।
जनवरी 2026 में आएंगे वोटर फॉर्म
पीयू प्रशासन ने बताया कि जनवरी 2026 में वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म जारी किए जाएंगे। चूंकि सैनेट का गठन 2026 में होना तय है, इसलिए नई वोटर लिस्ट भी उसी वर्ष बनाई जाएगी। चुनाव लड़ने के इच्छुक सदस्य अभी से तैयारी में जुट गए हैं। दो साल की देरी के कारण पूर्व और नए उम्मीदवारों—दोनों को ही वोटरों तक पहुंच बनाने के लिए सक्रिय प्रचार करना होगा।
उप-राष्ट्रपति से मिली मंजूरी
पीयू की 2026 सैनेट चुनाव प्रक्रिया को भारत के उप-राष्ट्रपति और पीयू के चांसलर ने मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी उस समय आई है जब सैनेट की 91 सीटों को घटाकर 31 करने वाले प्रस्ताव के विरोध में छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया था। अब चुनाव पुराने स्वरूप और सीट संरचना के साथ ही संपन्न होंगे।
