केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़े और संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में जांच एजेंसी ने 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें 4 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। CBI की जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के जरिए 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध रकम को भारत और विदेशों में घुमाया गया।
कई राज्यों में फैला था ठगी का जाल
CBI के मुताबिक, यह साइबर फ्रॉड नेटवर्क देश के कई राज्यों में सक्रिय था और हजारों लोगों को अलग-अलग ऑनलाइन ठगी के तरीकों से निशाना बनाया गया। ठगों ने भ्रामक लोन ऐप, फर्जी निवेश स्कीम, पोंजी और MLM मॉडल, नकली पार्ट-टाइम जॉब ऑफर और धोखाधड़ी वाले ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए आम लोगों से पैसे ठगे। हैरानी की बात यह है कि इन सभी गतिविधियों को एक ही संगठित नेटवर्क संचालित कर रहा था।
अक्टूबर 2025 में हुई पहली कार्रवाई
इस केस में CBI ने अक्टूबर 2025 में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन प्रमुख भारतीय सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता गया और साइबर तकनीक व वित्तीय लेन-देन की गहराई से पड़ताल की गई।
I4C की सूचना से खुला मामला
यह मामला गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) से मिले इनपुट के आधार पर दर्ज किया गया। शुरुआत में ये घटनाएं अलग-अलग साइबर शिकायतों जैसी लग रही थीं, लेकिन CBI के विश्लेषण में ऐप्स, फंड ट्रांसफर पैटर्न, पेमेंट गेटवे और डिजिटल सबूतों में कई चौंकाने वाली समानताएं सामने आईं।
हाई-टेक तरीकों से दी जा रही थी ठगी को अंजाम
जांच में पता चला कि साइबर अपराधियों ने बेहद आधुनिक और परतदार तरीका अपनाया था। इसके लिए Google Ads, बल्क SMS, SIM बॉक्स सिस्टम, क्लाउड सर्वर, फिनटेक प्लेटफॉर्म और सैकड़ों म्यूल बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल किया गया। हर स्तर पर ऐसा सिस्टम बनाया गया था जिससे असली संचालकों की पहचान छिपी रहे।
111 शेल कंपनियों से बना पूरा ढांचा
CBI की जांच में यह भी सामने आया कि इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क की नींव 111 शेल कंपनियों पर टिकी थी। इन कंपनियों को फर्जी पते, डमी डायरेक्टर और झूठे दस्तावेजों के आधार पर रजिस्टर कराया गया। इन्हीं कंपनियों के नाम पर बैंक खाते और पेमेंट गेटवे अकाउंट खोले गए, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को छुपाने और इधर-उधर भेजने के लिए किया गया।
1000 करोड़ से ज्यादा का संदिग्ध लेन-देन
सैकड़ों बैंक खातों की जांच में खुलासा हुआ कि इनके जरिए 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का लेन-देन हुआ। एक बैंक अकाउंट में ही कुछ ही समय में 152 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ट्रांसफर की गई थी।
कई राज्यों में छापेमारी
CBI ने कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड और हरियाणा में 27 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान बड़ी संख्या में डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
विदेश से हो रहा था नेटवर्क का संचालन
फॉरेंसिक जांच में यह बात भी सामने आई कि पूरे साइबर नेटवर्क का कंट्रोल विदेश से किया जा रहा था। जांच के दौरान कुछ UPI आईडी अगस्त 2025 तक विदेशी लोकेशन से सक्रिय पाई गईं, जिससे रियल-टाइम कंट्रोल की पुष्टि हुई।
2020 से चल रहा था विदेशी मास्टरमाइंड का खेल
CBI के मुताबिक, वर्ष 2020 से विदेशी हैंडलर्स के इशारे पर भारत में शेल कंपनियां बनाई जा रही थीं। इन विदेशी मास्टरमाइंड्स की पहचान Zou Yi, Huan Liu, Weijian Liu और Guanhua Wang के रूप में हुई है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस
CBI ने विदेशी आरोपियों, उनके भारतीय सहयोगियों और 58 कंपनियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स पर रोक कानून, 2019 के तहत मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई CBI के विशेष अभियान Operation CHAKRA-V के तहत की गई है।
