लोकसभा ने गुरुवार को भारी हंगामे के बावजूद ‘रोज़गार और रोज़ी-रोटी मिशन (ग्रामीण) – विकसित भारत: जी राम जी विधेयक, 2025’ को मंजूरी दे दी। ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा चर्चा का जवाब देने के बाद यह विधेयक ध्वनि मत से पारित हुआ। विधेयक के पारित होते ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी और अगली बैठक का समय तय किया।
पुराने कानून की जगह लेगा नया कानून
यह नया विधेयक करीब 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा। सरकार का कहना है कि समय के साथ ग्रामीण जरूरतें बदली हैं, ऐसे में रोजगार से जुड़ी योजना को और प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने की जरूरत थी।
मंत्री शिवराज सिंह चौहान का कांग्रेस पर हमला
चर्चा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मनरेगा की शुरुआत में महात्मा गांधी का नाम नहीं था, बल्कि बाद में चुनावी फायदे के लिए उनका नाम जोड़ा गया। मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने गांधी जी के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल किया और उनके आदर्शों के विपरीत फैसले लिए।
गांधी परिवार पर नामकरण का आरोप
शिवराज चौहान ने यह भी कहा कि कांग्रेस शासन में कई योजनाओं, इमारतों और संस्थानों के नाम गांधी परिवार के सदस्यों—जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी—के नाम पर रखे गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सिर्फ नाम का सहारा लेती रही, जबकि नीतियों में गांधीवादी सोच नहीं दिखी।
मनरेगा में भ्रष्टाचार के दावे
ग्रामीण विकास मंत्री ने दावा किया कि मनरेगा योजना में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ। उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार 60 प्रतिशत राशि मजदूरी और 40 प्रतिशत निर्माण सामग्री पर खर्च होनी चाहिए थी, लेकिन कई राज्यों में सामग्री पर बहुत कम खर्च दिखाया गया, जिससे गड़बड़ियों को बढ़ावा मिला।
नए विधेयक का उद्देश्य क्या है
सरकार के मुताबिक नए कानून का मकसद ग्रामीण इलाकों में रोजगार के साथ-साथ स्थायी विकास को बढ़ावा देना है। इस विधेयक के जरिए पारदर्शिता बढ़ाई जाएगी, तकनीक का अधिक उपयोग होगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी पैसा सही लोगों तक पहुंचे।
विकसित गांवों पर सरकार का फोकस
सरकार का कहना है कि यह विधेयक केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, आजीविका और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
लंबी चर्चा के बाद फैसला
इस विधेयक पर देर रात तक चर्चा हुई, जिसमें करीब 99 सांसदों ने हिस्सा लिया। विपक्ष ने जहां इसे गरीब विरोधी बताया, वहीं सरकार ने इसे ग्रामीण भारत के भविष्य के लिए जरूरी कदम बताया।
