पंजाब सरकार ने एक अहम प्रशासनिक फैसला लेते हुए जाने-माने अभिनेता गुलजार इंदर चहल को राज्य के इकोनॉमिक बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया है। इस पद के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। इसका मतलब यह है कि उन्हें कैबिनेट मंत्रियों जैसी शक्तियां, सुविधाएं और अधिकार प्राप्त होंगे। सरकार के इस निर्णय को आर्थिक नीतियों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आर्थिक मामलों में निभाएंगे अहम भूमिका
इकोनॉमिक बोर्ड के चेयरमैन के रूप में गुलजार इंदर चहल पंजाब सरकार को राज्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सलाह देंगे। इनमें निवेश को बढ़ावा देना, रोजगार के नए अवसर तैयार करना, उद्योगों को मजबूत करना और विकास योजनाओं को प्रभावी बनाना शामिल है। सरकार का मानना है कि उनके व्यावहारिक अनुभव और अलग सोच से पंजाब की आर्थिक दिशा को नई ऊर्जा मिलेगी।
कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलने से वे सीधे उच्च स्तर की बैठकों और फैसलों में भाग ले सकेंगे। इससे आर्थिक योजनाओं को जमीन पर उतारने में तेजी आने की उम्मीद की जा रही है।
फिल्म जगत से प्रशासन तक का सफर
गुलजार इंदर चहल पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने अभिनेता हरभजन मान के साथ फिल्म जग जिओंदियां दे मेले में अहम भूमिका निभाकर खास पहचान बनाई थी। इसके बाद वे हीर रांझा, आई एम सिंह और यारा ओ दिलदारा जैसी कई चर्चित फिल्मों में नजर आए।
उनकी यह नियुक्ति न केवल प्रशासनिक दृष्टि से बल्कि फिल्म जगत के लिए भी गर्व की बात मानी जा रही है। कला और सिनेमा से जुड़े व्यक्ति का इस तरह की जिम्मेदारी संभालना एक अलग और सकारात्मक संदेश देता है।
हॉलीवुड तक बनाई पहचान
गुलजार इंदर चहल ने अपने करियर की शुरुआत पंजाबी फिल्मों से की थी, लेकिन मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने बॉलीवुड और फिर अंतरराष्ट्रीय सिनेमा तक अपनी पहचान बनाई। वे पंजाब के पटियाला जिले के पहले ऐसे युवा माने जाते हैं, जिन्होंने एक हॉलीवुड फिल्म का निर्माण किया।
वर्ष 2018 में रिलीज हुई फिल्म द एक्स्ट्राऑर्डिनरी जर्नी ऑफ फकीर के वे निर्माता रहे। इस फिल्म में अभिनेता धनुष ने मुख्य भूमिका निभाई थी और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली थी।
सरकार को उनसे बड़ी उम्मीदें
पंजाब सरकार का मानना है कि गुलजार इंदर चहल का कला, संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स से जुड़ा अनुभव राज्य की आर्थिक योजनाओं के लिए फायदेमंद साबित होगा। निवेश, पर्यटन, फिल्म इंडस्ट्री और सांस्कृतिक गतिविधियों को आर्थिक विकास से जोड़ने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।
