समाजिक भाईचारे और समानता पर आधारित समाज के निर्माण के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर की लिखी किताबों और दिए गए भाषणों को फिर से पढ़ना और समझना बेहद जरूरी है। यह बात पंजाब राज्य अनुसूचित जातियां आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने कही। वे भारतीय संविधान के निर्माता, समाज सुधारक और दलितों के मसीहा डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
यह कार्यक्रम जालंधर बाइपास स्थित पंजाब के सबसे बड़े डॉ. बी.आर. अंबेडकर भवन में “जाति तोड़ो, समाज जोड़ो” विषय के तहत आयोजित किया गया। इस मौके पर चेयरमैन गढ़ी के साथ सामाजिक, राजनीतिक और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य डॉ. अंबेडकर के विचारों को आम लोगों तक पहुंचाना और सामाजिक समानता के संदेश को मजबूत करना था।
अपने संबोधन में जसवीर सिंह गढ़ी ने कहा कि देश में हजारों सालों से चली आ रही कुरीतियों और जातिगत दीवारों को तोड़ने के लिए बाबा साहिब अंबेडकर ने गहन शोध के आधार पर कई महत्वपूर्ण किताबें लिखीं। इनमें “शूद्र कौन थे?”, “द अनटचेबल्स” और “एनिहिलेशन ऑफ कास्ट” जैसी रचनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन किताबों को खासतौर पर अंबेडकरवादी समाज तक सही रूप में पहुंचाना आज समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि डॉ. अंबेडकर ने जिन ऐतिहासिक और सामाजिक तथ्यों को अपनी किताबों में उजागर किया, वे आज भी बड़े स्तर पर लोगों तक नहीं पहुंच पाए हैं। खासकर “शूद्र कौन थे?” किताब में आर्य समाज, शूद्रों की स्थिति, मूल निवासी की अवधारणा और देशी-विदेशी समाज के फर्क को लेकर जो बातें लिखी गई हैं, उन पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन विचारों को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां सामाजिक सच्चाई को समझ सकें।
जसवीर सिंह गढ़ी ने अंबेडकरवादी समाज से अपील की कि डॉ. अंबेडकर की किताबों को एक तरह से “रिफ्रेशमेंट कोर्स” की तरह पढ़ा जाए, ताकि समाज को नई दिशा मिल सके। उन्होंने कहा कि सिर्फ श्रद्धांजलि देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि बाबा साहिब के विचारों को जीवन में उतारना जरूरी है।
पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने अपनी लोकप्रियता पर कहा कि भले ही उन्होंने कई लोगों को न्याय दिलाया हो, लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। उन्होंने इसे एक बुनाई के काम से जोड़ते हुए कहा कि अभी तो धागा तैयार हो रहा है, पूरी चादर बननी बाकी है। उन्होंने बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से मेहनतकश रहा है और वे खुद भी उस संघर्ष को समझते हैं।
कार्यक्रम के दौरान लोगों की शिकायतें भी सुनी गईं। जिन लोगों की समस्याओं का समाधान पहले किया जा चुका था, उन्होंने चेयरमैन गढ़ी का धन्यवाद किया और उनके काम की सराहना की।
गौरतलब है कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस हर साल 6 दिसंबर को मनाया जाता है। इस अवसर पर देशभर में श्रद्धांजलि सभाएं, सामाजिक कार्यक्रम और रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं। इसी कड़ी में अंबेडकर सोसाइटी की ओर से रक्तदान शिविर भी लगाया गया, जिसमें युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदान किया।
