डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार एक बड़ा और सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। अब तक होता यह था कि अगर किसी स्कैमर को WhatsApp पर ब्लॉक कर दिया जाता था, तो वह आसानी से Telegram, Snapchat या Instagram जैसे दूसरे प्लेटफॉर्म पर लोगों को ठगना शुरू कर देता था। लेकिन आने वाले समय में यह चालाकी काम नहीं आएगी।
सरकार एक ‘यूनिफाइड ब्लॉकिंग सिस्टम’ पर काम कर रही है, जिससे साइबर ठगों को सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से एक साथ बाहर का रास्ता दिखाया जा सकेगा।
एक प्लेटफॉर्म पर बैन, हर जगह से ब्लॉक
इस प्रस्तावित सिस्टम के तहत अगर किसी मोबाइल नंबर को WhatsApp जैसे किसी मैसेजिंग ऐप पर फ्रॉड या नियमों के उल्लंघन के कारण बैन किया जाता है, तो वह नंबर पूरे डिजिटल इकोसिस्टम में ब्लॉक हो जाएगा। इसके लिए WhatsApp, Telegram, Instagram और Snapchat जैसे बड़े प्लेटफॉर्म सरकार के साथ उन नंबरों की जानकारी साझा करेंगे, जो संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं।
सरकार इन सभी नंबरों को एक सेंट्रल डेटाबेस में दर्ज करेगी। इसके बाद जैसे ही कोई बैन किया गया नंबर किसी दूसरे ऐप पर अकाउंट बनाने की कोशिश करेगा, वह अपने आप ब्लॉक हो जाएगा। इससे साइबर ठगों के लिए प्लेटफॉर्म बदलकर बच निकलना नामुमकिन हो जाएगा।
SIM बाइंडिंग होगी अनिवार्य
सरकार का अगला बड़ा कदम है ‘SIM बाइंडिंग’। अभी कई स्कैमर एक बार OTP लेकर अकाउंट बना लेते हैं और फिर SIM कार्ड निकालकर फेंक देते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। नए नियम के बाद ऐसा नहीं हो पाएगा।
SIM बाइंडिंग लागू होने के बाद, अगर किसी मोबाइल फोन में एक्टिव SIM कार्ड नहीं होगा, तो WhatsApp या अन्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इससे फ्रॉड होने की स्थिति में अपराधी की पहचान और लोकेशन तक तुरंत पहुंचना आसान हो जाएगा।
क्यों जरूरी है यह सख्ती
WhatsApp की मंथली रिपोर्ट बताती है कि हर महीने लाखों फर्जी और संदिग्ध अकाउंट ब्लॉक किए जाते हैं, फिर भी साइबर अपराध कम नहीं हो रहे। इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि ठग एक ऐप से दूसरे ऐप पर आसानी से शिफ्ट हो जाते हैं।
सरकार का मानना है कि जब तक सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म आपस में मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक साइबर सुरक्षा को पूरी तरह मजबूत नहीं किया जा सकता।
आम लोगों को मिलेगा बड़ा फायदा
इस नई व्यवस्था से आम यूजर्स को बड़ी राहत मिलेगी। ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, फेक मैसेज और डिजिटल स्कैम पर काबू पाने में यह सिस्टम मील का पत्थर साबित हो सकता है। सरकार का साफ संदेश है—अब डिजिटल ठगी के लिए देश में कोई जगह नहीं।
