दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों—बाबा जोरावर सिंह जी, बाबा फतेह सिंह जी और माता गुजर कौर जी—की बेमिसाल शहादत को श्रद्धांजलि देने के लिए गुरुवार को खन्ना से फतेहगढ़ साहिब तक श्रद्धा और आस्था से भरी पैदल यात्रा निकाली गई। इस पवित्र यात्रा का नेतृत्व पंजाब के पर्यटन, सांस्कृतिक मामलों, ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने किया। बड़ी संख्या में संगत उनके साथ शामिल हुई।
गुरुद्वारा श्री सुख सागर साहिब से हुई शुरुआत
यात्रा की शुरुआत खन्ना स्थित गुरुद्वारा श्री सुख सागर साहिब से हुई। यहां मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद और संगत ने मत्था टेककर अरदास की और ‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप किया। इसके बाद श्रद्धालु गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब की पवित्र धरती पर नतमस्तक होने के लिए पैदल रवाना हुए।
शहादत को बताया इतिहास की अमर मिसाल
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि साहिबजादों और माता गुजर कौर जी की शहादत दुनिया के इतिहास में सच्चाई, धर्म और इंसानियत की सबसे महान मिसालों में से एक है। उन्होंने कहा कि इतनी छोटी उम्र में भी साहिबजादों ने अत्याचार के आगे झुकने से इनकार कर दिया और धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
गुरु गोबिंद सिंह जी के बलिदान को किया याद
मंत्री सौंद ने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने देश, समाज और मानवता के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। आज हम जो आज़ादी और सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं, वह गुरुओं की कुर्बानियों का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि हमारी पहचान, हमारी पगड़ी और हमारा स्वाभिमान गुरुओं के बलिदान से ही सुरक्षित है।
पंजाब की खुशहाली के लिए अरदास
उन्होंने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि देना ही नहीं, बल्कि गुरु साहिब से पंजाब की खुशहाली, शांति और सभी के भले की अरदास करना भी है। फतेहगढ़ साहिब पहुंचकर संगत गुरु साहिब के चरणों में नतमस्तक होकर यह प्रार्थना करेगी कि सच्चे मार्ग पर चलने की शक्ति और आशीर्वाद हमेशा बना रहे।
श्रद्धा, एकता और विश्वास का संदेश
यह पैदल यात्रा न सिर्फ शहादत की याद दिलाने वाली रही, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को साहिबजादों के बलिदान, साहस और सच्चाई के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देने का भी सशक्त संदेश बनी।
