हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब पहुंचकर दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह जी, बाबा फतेह सिंह जी और जगत माता गुजरी जी की महान शहादत को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी शर्मा भी उनके साथ मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने सबसे पहले गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में माथा टेककर अरदास की और साहिबजादों की अमर कुर्बानी को याद किया। इसके बाद वे गुरुद्वारा बाबा मोती राम मेहरा पहुंचे, जहां उन्होंने मानवता और सेवा की मिसाल बने बाबा मोती राम मेहरा को नमन किया। गुरुद्वारा परिसर में बाबा मोती राम मेहरा ट्रस्ट के चेयरमैन निर्मल सिंह ने मुख्यमंत्री को सिरोपा देकर सम्मानित किया।
साहिबजादों की शहादत इतिहास में अमर
इस मौके पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके पूरे परिवार की शहादत ने सिख धर्म और इंसानियत को नई पहचान दी। उन्होंने कहा कि मुगल हुकूमत के जुल्मों के सामने झुकने की बजाय छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह ने अपने धर्म और सिद्धांतों की रक्षा करते हुए बहुत कम उम्र में शहादत दी, जो विश्व इतिहास में बेमिसाल है।
उन्होंने कहा कि माता गुजरी जी ने भी ठंडे बुर्ज में रहकर अपार कष्ट सहन किए, लेकिन अपने विश्वास से कभी डगमगाईं नहीं। यह त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
बाबा मोती राम मेहरा की मानवता की मिसाल
मुख्यमंत्री ने बाबा मोती राम मेहरा की सेवा भावना को याद करते हुए कहा कि जब साहिबजादों और माता गुजरी जी को कैद में रखा गया था, तब बाबा मोती राम मेहरा ने अपनी जान की परवाह किए बिना उन्हें गर्म दूध पिलाकर मानवता का धर्म निभाया। इस सेवा के लिए उन्हें और उनके छोटे बच्चे को भी निर्दयता से शहीद कर दिया गया। ऐसी कुर्बानी पूरी दुनिया में दुर्लभ है।
नई पीढ़ी के लिए संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि फतेहगढ़ साहिब की धरती हमें सच्चाई, साहस और बलिदान का संदेश देती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे गुरुओं और साहिबजादों के दिखाए रास्ते पर चलें और समाज में भाईचारा, सेवा और इंसानियत को आगे बढ़ाएं।
