आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने शुक्रवार सायं कहा कि ‘साहिबज़ादों का बलिदान दिवस’ नाम, ‘वीर बाल दिवस’ की तुलना में छोटे साहिबज़ादों की महान शहादत को स्मरण करने का कहीं अधिक उपयुक्त और सम्मानजनक माध्यम है। उन्होंने कहा कि यह नाम सिख संगत की भावनाओं और धार्मिक मर्यादा के साथ पूरी तरह मेल खाता है।
श्री अमन अरोड़ा ने सांसद मलविंदर सिंह कंग और गुरमीत सिंह ‘मीत हेयर’ के साथ गुरुद्वारा श्री फ़तेहगढ़ साहिब में माथा टेककर बाबा जोरावर सिंह, बाबा फ़तेह सिंह और माता गुजरी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
शहादत: इतिहास का अद्वितीय अध्याय
इस अवसर पर अमन अरोड़ा ने कहा कि छोटे साहिबज़ादों की शहादत विश्व इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जो धर्म, साहस और अडिग आस्था के सर्वोच्च आदर्शों को दर्शाता है। अत्यंत कम आयु में दिया गया उनका बलिदान आज भी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है और अन्याय के विरुद्ध मजबूती से खड़े रहने का संदेश देता है।
नाम परिवर्तन की मांग पर पहले भी दिया जा चुका है जोर
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और आम आदमी पार्टी के सांसद पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि ‘वीर बाल दिवस’ की जगह ‘साहिबज़ादों का बलिदान दिवस’ नाम होना चाहिए। इससे देश-विदेश में बसे सिख समुदाय की भावनाओं और धार्मिक संवेदनशीलता का पूरा सम्मान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
फतेहगढ़ साहिब: बलिदान की पवित्र स्मृति
अमन अरोड़ा ने कहा कि फ़तेहगढ़ साहिब सिख इतिहास का एक अत्यंत पवित्र स्थल है। यह स्थान दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार द्वारा दी गई अतुलनीय कुर्बानियों की निरंतर याद दिलाता है। उनकी धर्मनिष्ठा, वीरता और निःस्वार्थता की विरासत आज भी समाज को मार्गदर्शन प्रदान कर रही है।
मानवता के लिए अमर संदेश
उन्होंने कहा कि साहिबज़ादों की शहादत केवल सिख इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए एक अमर संदेश है। यह त्याग हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए किसी भी कठिनाई से पीछे नहीं हटना चाहिए। यह बलिदान गाथा सदैव राष्ट्र की सामूहिक चेतना में जीवित रहेगी।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान विधायक लखबीर सिंह राय, रुपिंदर सिंह हैप्पी और देविंदरजीत सिंह लाडी ढोस, पर्यटन विभाग के सलाहकार दीपक बाली तथा उपायुक्त डॉ. सोना थिंद भी उपस्थित रहे। सभी ने साहिबज़ादों की शहादत को नमन करते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताया।
