पंजाब विधानसभा में मनरेगा (MGNREGA) से जुड़े एक प्रस्ताव पर तीखी बहस चल रही है। इस दौरान विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच गरीब मजदूरों के अधिकारों को लेकर कड़ा टकराव देखने को मिला। बहस के केंद्र में यह सवाल रहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे बदलाव क्या वास्तव में ग्रामीण गरीबों के हित में हैं या उनके रोजगार पर संकट पैदा करेंगे।
कुलदीप सिंह धालीवाल का सख्त रुख
इस प्रस्ताव पर बोलते हुए विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने साफ कहा कि वह मनरेगा के खिलाफ पेश किए गए प्रस्ताव का पूरा समर्थन करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा लाया जा रहा प्रस्ताव सीधे तौर पर गरीब मजदूरों के खिलाफ है। धालीवाल ने कहा कि मेहनत करके रोजी-रोटी कमाने वालों के हक छीने जा रहे हैं, जो किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
किसानों के संघर्ष का जिक्र
धालीवाल ने अपने भाषण में किसानों के पिछले आंदोलनों का हवाला देते हुए कहा कि पहले किसानों के खिलाफ काले कानून लाए गए थे, जिन्हें लंबे संघर्ष के बाद वापस लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब उसी तरह गरीब मजदूरों के खिलाफ नया कानून लाया जा रहा है। उनका आरोप था कि अगर मेहनतकश लोगों की कमाई का रास्ता बंद कर दिया गया, तो वे अपने परिवार का पेट कैसे पालेंगे।
गांवों की महिलाओं पर असर
विधायक ने खासतौर पर ग्रामीण इलाकों की गरीब महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गांवों में मनरेगा गरीब महिलाओं के लिए रोटी और गुजारे का बड़ा सहारा है। अगर उनसे रोजगार छीन लिया गया, तो वे अपने बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च कैसे चलाएंगी? यह सिर्फ रोजगार का नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीने का सवाल है।
संघर्ष की चेतावनी
धालीवाल ने दो टूक कहा कि गरीबों के हक के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ी जाएगी। चाहे प्रधानमंत्री के दरवाजे पर जाना पड़े या जेल जाना पड़े, वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह इस प्रस्ताव का विरोध करने का ऐलान किया।
आम आदमी पार्टी का ऐलान
धालीवाल ने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी देशभर में मजदूरों की लड़ाई लड़ेगी। पार्टी का दावा है कि वह मनरेगा योजना को कमजोर या खत्म नहीं होने देगी और किसी भी हाल में इसे लागू होने से रोकेगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पंजाब की नहीं, बल्कि पूरे देश के गरीब मजदूरों की है।
