पंजाब विधानसभा में केंद्र सरकार द्वारा MGNREGA का नाम बदलकर ‘जी राम जी’ करने के फैसले के खिलाफ एक प्रस्ताव लाया गया। इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन का माहौल काफी गरम रहा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस फैसले को गरीब और मजदूर वर्ग के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
“मजदूरों की रोटी MGNREGA से चलती थी”
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों मजदूरों की रोज़ी-रोटी का सहारा रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना से गांवों के गरीब परिवारों को काम मिला और सम्मान के साथ जीने का मौका मिला। अब नाम बदलने और शर्तों में बदलाव से मजदूरों का भविष्य खतरे में डाला जा रहा है।
धर्म के नाम पर राजनीति का आरोप
चीमा ने आरोप लगाया कि देश के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी सरकारी योजना का नाम सीधे धर्म के नाम पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने श्री राम जी के नाम के पीछे छिपकर मजदूरों के अधिकारों पर हमला किया है। उनका कहना था कि आस्था के नाम पर गरीबों के हक छीने जा रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
“श्री राम जी का नाम इस्तेमाल न करें”
हरपाल चीमा ने भावुक लहजे में कहा कि श्री राम जी सभी के लिए पूजनीय हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि भगवान के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल न किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब किसी योजना में गड़बड़ी होगी या उसका विरोध होगा, तो नारे लगेंगे और ‘जी राम जी’ शब्द विवाद में आएगा। इससे बेअदबी जैसी स्थिति बनेगी, जिसकी जिम्मेदारी भाजपा पर होगी।
राज्यों के अधिकारों पर हमला
वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्यों के अधिकार छीन रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाओं को पूरी तरह सेंट्रलाइज़ किया जा रहा है, जिससे राज्यों की भूमिका कमजोर हो रही है। यह न सिर्फ संघीय ढांचे के खिलाफ है, बल्कि संविधान की भावना के भी विपरीत है।
मजदूरों को “दास” बनाने का आरोप
चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूरों को गुलाम और दास बनाने की कोशिश जैसी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे देश में मजदूरों के अधिकारों पर “डाका” डाला गया है। काम, मजदूरी और सम्मान—तीनों पर एक साथ हमला किया जा रहा है।
कड़ी निंदा और जनता से अपील
हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार की इस योजना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि देश की जनता को यह समझना चाहिए कि सत्ताधारी सरकार किस तरह गरीबों पर ज़ुल्म कर रही है। पंजाब विधानसभा में लाया गया यह प्रस्ताव सिर्फ एक राज्य का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे देश के मजदूरों के हक की आवाज़ है।
