पंजाब की भगवंत मान सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य में सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से वर्कप्लेस पर महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर मिलेंगे। यह कदम न सिर्फ रोजगार के नए रास्ते खोलेगा, बल्कि पंजाब के सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूत बनाएगा।
कैबिनेट की मंजूरी, सभी वर्गों की नौकरियों में लागू
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। इसके तहत ग्रुप A, B, C और D की सभी सरकारी नौकरियों में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि इससे महिलाएं केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि प्रशासनिक और निर्णय लेने वाले पदों पर भी उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
प्रशासन में महिलाओं की मजबूत भागीदारी
सरकार का मानना है कि जब महिलाएं प्रशासन का हिस्सा बनेंगी, तो नीतियां ज्यादा संवेदनशील और संतुलित होंगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और महिला कल्याण से जुड़े फैसलों में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। यह आरक्षण नीति महिलाओं को नेतृत्व की भूमिकाओं में लाने का रास्ता खोलेगी।
पहले भी महिलाओं के हित में फैसले
यह पहली बार नहीं है जब मान सरकार ने महिलाओं के लिए बड़ा कदम उठाया हो। इससे पहले आशीर्वाद योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। हाल ही में इस योजना के लिए 13 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जारी की गई, जिससे हजारों परिवारों को राहत मिली।
रोज़गार में भागीदारी बढ़ाने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आरक्षण नीति से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और रोजगार में उनकी हिस्सेदारी बढ़ेगी। पंजाब में महिला साक्षरता दर में तो सुधार हुआ है, लेकिन नौकरीपेशा महिलाओं का प्रतिशत अभी भी अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में यह फैसला उस अंतर को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
आंकड़े क्या कहते हैं
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में महिलाओं की वर्कफोर्स में हिस्सेदारी 2020-21 में 21.1% थी, जो 2022-23 में बढ़कर 25.2% हो गई है। हालांकि, यह अभी भी राष्ट्रीय औसत लगभग 36% से कम है। सरकार का लक्ष्य इस अंतर को धीरे-धीरे कम करना है।
बराबरी और न्याय की दिशा में पहल
मान सरकार का यह फैसला सिर्फ नौकरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बराबरी और जेंडर जस्टिस की दिशा में एक मजबूत कदम है। आने वाले समय में इसका असर पंजाब के समाज और प्रशासन दोनों में साफ दिखाई देगा और यह पहल “रंगला पंजाब” के सपने को और मजबूत करेगी।
