मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़ों ने एशियाई शेयर बाजारों को हिला दिया है। निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ने से भारत समेत कई देशों के बाजारों में तेज गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक हालात और आर्थिक संकेतक मिलकर बाजार पर दबाव बना रहे हैं।
भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट
भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान BSE Sensex करीब 1,000 अंक तक गिर गया। इससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया। बाजार खुलते ही बिकवाली हावी रही और कई सेक्टरों में कमजोरी देखी गई।
एशियाई बाजारों में दबाव
एशिया के प्रमुख सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। जापान का Nikkei 225 लगभग 2% तक टूट गया और बाद में करीब 1.5% की गिरावट के साथ 57,947 के आसपास कारोबार करता दिखा।
हांगकांग का Hang Seng Index 1.7% गिरकर 26,165 के स्तर पर पहुंच गया।
चीन का Shenzhen Component Index भी 100 से ज्यादा अंकों की गिरावट के साथ नीचे कारोबार करता नजर आया। दक्षिण कोरिया में सार्वजनिक अवकाश के कारण बाजार बंद रहा।
अमेरिकी बाजार और फ्यूचर्स
अमेरिका में भी शुरुआती कारोबार में दबाव दिखा। S&P 500, Dow Jones Industrial Average और NASDAQ Composite में शुरुआत में 1% से ज्यादा गिरावट आई, हालांकि बाद में कुछ रिकवरी देखने को मिली।
सोने और तेल में तेजी
अनिश्चित माहौल में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। सोने की कीमतों में उछाल आया और यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 2.5% से ज्यादा बढ़ गए।
तेल बाजार में भी हलचल रही। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों पर हमले की खबरों के बाद कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े। अमेरिकी क्रूड लगभग 4% की बढ़त के साथ 69 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा, जबकि ब्रेंट क्रूड 76 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा।
करेंसी बाजार की स्थिति
मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर मजबूत रहा। डॉलर के मुकाबले जापानी येन और यूरो में हल्की कमजोरी देखी गई।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट तनाव और अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। शेयर बाजारों में गिरावट, सोने और तेल में तेजी और डॉलर की मजबूती इस अनिश्चित माहौल को दर्शाती है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर भू-राजनीतिक घटनाक्रम और आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी।
