मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष का सीधा असर Strait of Hormuz पर दिखाई दे रहा है। यह संकरा समुद्री मार्ग ईरान की दक्षिणी सीमा के पास स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी व अरब सागर से जोड़ता है। पहले यह दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में गिना जाता था, लेकिन अब इसे हाई रिस्क जोन माना जा रहा है।
हमलों से बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में यहां से गुजरने वाले कई जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें आई हैं। कुछ तेल टैंकरों को नुकसान पहुंचा है और एक क्रू मेंबर की मौत की सूचना भी सामने आई है। इन घटनाओं ने शिपिंग कंपनियों और तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ा दी है।
दुनिया की तेल सप्लाई की लाइफलाइन
इस जलडमरूमध्य से रोजाना करीब 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है। दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से होता है। सऊदी अरब (38%), इराक (22%), यूएई (15%), ईरान (11%), कुवैत (9%) और कतर (5%) जैसे देश अपने निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
तेल आयात करने वाले देशों में चीन (33%), भारत (13%), दक्षिण कोरिया (12%) और जापान (11%) प्रमुख हैं।
जहाजों की आवाजाही में गिरावट
लॉयड्स लिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, जहां आम तौर पर रोज करीब 100 से ज्यादा जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं 1 मार्च को केवल 19 जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई। सुपरटैंकरों की संख्या भी घटकर सिर्फ 4 रह गई। जो जहाज गुजर रहे हैं, वे धीमी गति से चल रहे हैं। इससे ट्रांसपोर्ट का समय बढ़ रहा है और सप्लाई चेन पर दबाव पड़ रहा है। बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई की लागत भी बढ़ रही है, जिसका असर तेल की कीमतों पर दिख सकता है।
भारत और चीन पर असर
भारत खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस आयात करता है। अगर सप्लाई बाधित होती है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और महंगाई बढ़ने का खतरा रहेगा। रुपये पर भी दबाव आ सकता है।
चीन भी खाड़ी पर निर्भर है, लेकिन उसके पास रूस और मध्य एशिया से पाइपलाइन सप्लाई और बड़े भंडार मौजूद हैं, जिससे उसे कुछ राहत मिल सकती है।
अमेरिका की भूमिका
अमेरिका की नौसेना इस क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने के लिए काफिलों को एस्कॉर्ट कर सकती है और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर सकती है। इससे जोखिम कुछ हद तक कम हो सकता है, लेकिन पूरी तरह खतरे को खत्म करना आसान नहीं है।Strait of Hormuz केवल एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी है। यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो इसका असर तेल कीमतों, महंगाई और वैश्विक व्यापार पर लंबे समय तक पड़ सकता है।
