होली का त्योहार खुशियों, रंगों और मेल-मिलाप का प्रतीक है, लेकिन डिजिटल दौर में यह त्योहार साइबर अपराधियों के लिए भी मौका बन जाता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि होली के नाम पर भेजे जा रहे फर्जी ऑफर और उपहार के संदेश लोगों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
अक्सर साइबर ठग लोगों को आकर्षक ऑफर दिखाकर जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। इन संदेशों में दावा किया जाता है कि किसी बड़ी कंपनी या बैंक की ओर से होली का खास गिफ्ट या छूट दी जा रही है।
कैसे काम करता है ठगी का तरीका
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ठग आमतौर पर व्हाट्सएप या एसएमएस के जरिए एक लिंक भेजते हैं। संदेश में लिखा होता है कि लिंक पर क्लिक करके होली गिफ्ट या ऑफर का लाभ लिया जा सकता है।
जैसे ही कोई व्यक्ति उत्सुकता में उस लिंक पर क्लिक करता है, उसके मोबाइल में एक एपीके फाइल डाउनलोड करने का विकल्प सामने आता है। यह फाइल असल में एक प्रकार का मैलवेयर होता है।
यदि यह फाइल फोन में इंस्टॉल हो जाती है तो मोबाइल का नियंत्रण साइबर अपराधियों के हाथ में पहुंच सकता है। इसके बाद वे फोन की कई जानकारी तक पहुंच हासिल कर लेते हैं।
ओटीपी और बैंकिंग जानकारी पर नजर
मैलवेयर इंस्टॉल होने के बाद ठग मोबाइल के मैसेज, ईमेल और कई ऐप्स तक पहुंच बना लेते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि वे आपके फोन पर आने वाले ओटीपी को भी पढ़ सकते हैं।
इसके बाद वे डिजिटल पेमेंट ऐप्स या बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करके कुछ ही मिनटों में बैंक खाते से पैसे निकाल सकते हैं। कई मामलों में लोगों को पता भी नहीं चलता और उनका खाता खाली हो जाता है।
निजी जानकारी भी हो सकती है चोरी
यह खतरा केवल पैसों तक सीमित नहीं है। साइबर अपराधी आपके फोन में मौजूद फोटो, दस्तावेज़ और अन्य निजी जानकारी भी चुरा सकते हैं।
बाद में इस जानकारी का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इसलिए ऐसे लिंक या संदेशों से सावधान रहना बेहद जरूरी है।
कैसे रहें सुरक्षित
विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों के समय ऑनलाइन सतर्कता और भी जरूरी हो जाती है। अनजान नंबरों से आए किसी भी लुभावने ऑफर वाले लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए।
किसी भी बैंक या आधिकारिक संस्था की ओर से व्हाट्सएप के जरिए ऐप डाउनलोड करने का निर्देश नहीं दिया जाता। इसलिए ऐसे संदेशों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
साथ ही अपने मोबाइल फोन में अज्ञात स्रोतों से ऐप इंस्टॉल करने का विकल्प बंद रखना चाहिए।
धोखाधड़ी होने पर क्या करें
अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गया है, तो तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है। ऐसे मामलों में राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत संपर्क करना चाहिए।
समय रहते शिकायत करने से कई बार पैसे को वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है।
त्योहारों की खुशी के बीच सतर्क रहना ही साइबर अपराध से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।
